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अंधेरों की चादर ओढ़े अमेठी का विकास, आज़ादी के 70 साल बाद भी लालटेन की रोशनी में जीनें को मजबूर लोग


अलीम खान 
अमेठी (यूपी). उत्तर प्रदेश का अमेठी ज़िला नेहरु-गांधी परिवार का गढ़ है, और फ़िलवक्त कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहां से तीसरी बार सांसद चुने गये हैं। उनका दावा है के अमेठी में विकास की बयार बहाई गई है, कुछ सालों से यहां की राजनीति में तड़का लगा चुकी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी गाहे-बगाहे अमेठी में होते  विकास अपना और बीजेपी का सेहरा बांधती नज़र आ चुकी हैं। लेकिन सच्चाई ये है के अमेठी का विकास अंधेरों की चादर ओढ़े है और आज़ादी के 70 साल बाद भी यहां के गांवों में लोग लालटेन की रोशनी में जीनें को मजबूर हैं।

नौनिहाल बोले: योगी जी हमारे गांव में लाइट पहुँचा दीजिये, हम भी पढ़-लिख कर कुछ बन सके
दरसल अमेठी के विकास पर बट्टा लगाने वाला ये मामला ज़िले के पूरे हेम सिंह का पुरवा मजरे रेसी गाँव से जुड़ा है। 21 वीं सदी में जहां लोगों ने आज़ादी की 70 वीं वर्षगांठ मना डाली है वहीं इस गांव के लोग बिजली के अभाव में अंधेरे जीने को मजबूर। आपको बता दें कि ऐसा भी नही है कि इस क्षेत्र में बिजली का काम नही हुआ, काम हुआ लेकिन बस जगह-जगह खंम्बे गाड़ कर छोड़ दिये गये। गांव के लोगों की मानें तो खंम्बे गड़े हुए 15 साल बीत गए लेकिन इन पर तार डालने काम साहब लोग भूल गए। गाँव के नौनिहालों की बात करें तो कोइ डॉक्टर बनना चाहता है,  तो कोई इंजीनियर लेकिन ऐसा संम्भव तब होगा जब ये खूब पढ़ेंगे। क्या लालटेन और ढिबरी की रोशनी में इनकी पढ़ाई संभव है? इन नौनिहालों का बस यही कहना है कि योगी जी हमारे गांव में लाइट पहुँचा दीजिये ताकि हम भी पढ़-लिख कर कुछ बन सके।

ग्रामीण बोले: शिकायत करते-करते थक चुके हैं हमारी कोई सुनने वाला नही

अपनी समस्या का जिक्र करते हुए गाँव के लोगों का कहना है बिजली न होने की वजह से हमे बहुत सारी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है। हम भी चाहते है कि हमारे बच्चे पढ़-लिख कर कुछ बने,  
दुनिया कहा से कहा पहुंच गई है लेकिन हम अधेरे में ही गुज़ारा करने को मजबूर हैं।  
हमारे बच्चों ने आज तक टीवी ही नही देखा है, ऐसा भी नही है कि हमारे घर मे टीवी नही है। महिलाएं बताती हैं हम अपने शादी में टीवी अपने घर से लाये थे,  लेकिन इस गाँव में आ के पता चला कि यह तो आज तक लाइट ही नही आई है। ऐसे में हम बाहरी दुनिया से पूरी तरह से अनजान रहते है। ग्रामीणोंं ने बताया कि हम शिकायत करते-करते थक चुके हैं  लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नही। 

मीडिया के माध्यम से ज़िम्मेदार को हुई खबर
इस मामले में जब अमेठी के अधीक्षण अधिशासी अभियंता पीके ओझा से बात किया गया तो उन्होंने कहा कि ये मामला मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आया है। अधिकतम दो महीने के समय में इस समस्या को निस्तारित कर लिया जाएगा।

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