डॉ ओपी भारती
गोण्डा (वजीरगंज) :- वजीरगंज क्षेत्र के एक गांव में गैंग रेप के बाद पुलिसिया संवेदनहीनता सवालों के घेरे में है। घटना के 20 घंटे बाद प्राथमिकी तो दर्ज की किन्तु अपने मुताबिक।
स्थानीय पुलिस ने क्षेत्र के एक गांव में शनिवार शाम हुए गैंगरेप में रविवार पूरा दिन लीपापोती में लगी रही । शाम को मामला क्षेत्राधिकारी ब्रह्मा सिंह के संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने की औपचारिकता तो पूरी की , किन्तु वास्तविकता से परे । पीड़िता व उसके परिजन रोते - विलखते 3 लोगों द्वारा रेप करने की गुहार करते रहे , किन्तु थाने के आला हाकिम समेत किसी भी पुलिस कर्मी की कान पर जूं तक नहीं रेंगी । शनिवार रात दो बजे गोंडा - फैजाबाद मार्ग पर अनुभुला के पास सड़क किनारे अचेता अवस्था में पड़ी पीडिता को पुलिस ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाई । प्राथमिक उपचार के बाद होश में आई तब उसने खुद के साथ हुई घटना को भी बताया। किन्तु पुलिस द्वारा पीड़िता की मदद करना तो दूर , उसको उसके घर पहुंचा कर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर लिया । पीड़िता द्वारा अपने परिजनो को आप बीती सुनाई , तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई । वे पुनः पीड़िता को लेकर थाने आये , किन्तु पूरे दिन मित्र पुलिस जांच का ढोंग करती रही । मामला क्षेत्राधिकारी तक पहुंचने के बाद प्राथमिकी तो दर्ज की , किन्तु जैसा चाहा - वैसा । पीड़िता बार - बार 3 लोगों के द्वारा उसकी अस्मत से खेलने की बात कही गई , पर पुलिस ने सिर्फ रेप लिखा और दो अन्य अज्ञात को सहयोगी दर्शाया है । सवाल उठता है कि रात में इलाज के लिए लाई गई लड़की के बयान को पुलिस ने नजरअंदाज क्यों किया? पीड़ित द्वारा 3 लोगों के रेप करने के आरोप को अनसुना कर एक आरोपी को नामजद तथा 2 को सहयोगी क्यो बनाया? आखिर पुलिस किसके दबाव में लेटलतीफी की ? ऐसे अनेक अनुत्तरित प्रश्न पुलिसिया कार्य शैली पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। फिलहाल पीड़िता को चिकित्सीय परीक्षण हेतु भेजा गया है । क्षेत्राधिकारी ब्रह्मा सिंह ने बताया कि सूचना पर वे खुद मौके पर गए मामला दर्ज कर एक आरोपी हिरासत में है, लड़की के बयान के बाद अगर गैंग रेप है तो अन्य आरोपियों को शीघ्र गिरफ्त में लिया जायेगा।


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