ओपी भारती
गोण्डा।वजीरगंज, मानव मूल्यों को समझे बिना दुनिया का कोई भी पद ,प्रतिष्ठा कोई मायने नही रखती ।मानवता ही इस दुनिया का श्रेष्ठतम धर्म है। ये सभ्य मानव को जीवन जीने की कला देता है। यह बात क्षेत्र के महादेवा स्थित गौरेश्वरनाथ मन्दिर पर रामकथा कहते हुए काशी से आये गणेश जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा यदि आप के अन्दर मानव मूल्यों की समझ नही है, तो सारा पूजा-पाठ व्यर्थ सा प्रतीक होगा। उन्होंने कहा कि उपासना,प्रार्थना मानवी प्रवृत्ति को जागृत कर देती है। इसे समाज के हर सामाजिक प्राणी को अपनाना चाहिए। महाराज ने कहा कि सर्व धर्म में मानवता की सेवा उसका आचरण है व सबसे बड़ी पूजा है। रामचरित मानस में समस्त समाज के सर्व वर्गो एवं स्थितियों को समाहित कर मानव समाज की भाषा में मानव जीवन की सीख देने का ग्रन्थ मानस है। गोस्वामी तुलसीदास ने इस ग्रन्थ में जीवन की चुनौतियाँ से निपटने के मार्ग बताये गये है। जिसका अध्ययन कर मानव जीवन का कल्याण किया जा सकता है। कथा के अंत में भगवान की झांकी का प्रदर्शन कर आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। भीषण ठंड के बावजूद भारी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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