1 करोड़ 20 लाख रूपए का हो गया बंदर-बांट
सुनील उपाध्याय
बस्ती:।आईटीआई बस्ती जिसे प्रदेश का पहला सर्विलासं वाले संस्थान होने का तमगा हासिल है। आज सवालों के घेरे में आ गया है, कारण कि यहां मोटर ड्राइविंग सिखाने के नाम पर जहां सरकार के साथ धोखाधड़ी की गई है, वहीं छात्रों को भी मौत के मुंह में ढकेल दिया गया है।
हम आपकों बता दें कि इस आईटीआई में युवाओं को आसानी से रोजगार मिल सके इसके लिए सरकार द्वारा कई टेªड दिए गए हैं। जिसमें से एक मोटर ड्राइविंग भी हैं, सवाल इस बात पर उठ रहा है कि जिस वाहन से यह संस्थान ड्राविंग सिखाने की बात कर रहा है, वह वर्षों से खराब पड़ी है। और अब तक यहां से 1920 छात्रों ने प्रशिक्षण भी लिया है। जिनपर 1 करोड़ 20 लाख रूपए खर्च कर दिए गए। कहीं ऐसा तो नहीं कि इतने रूपयों का बंदर-बांट कर लिया गया।
भविष्य के साथ कर दिया खिलवाड़
सोंचिए जरा जिन 1920 छात्रों को इस केंद्र से मोटर ड्राविंग का प्रमाण पत्र जारी किया गया है, उनके भविष्य के साथ कितना भद्दा खिलवाड़ किया गया। हैरानी इस बात की हो रही है कि वे 1920 प्रमाण पत्र धारी किस तरह अपना जीवन यापन कर रहे होंगे, जिन्होंने कभी स्टेयरिंग भी नहीं थामी है।
गाड़ी चली नही तो कहां खर्च हो गए 1 करोड़ 20 लाख
जिस मैटाडोर से मोटर ड्राइविंग सिखने की बात की जा रही है, वो तो वर्षों से खराब पड़ी है, और जिन छात्रों ने यहां से ट्रेनिंग ली है, उन्हें सिर्फ प्रमाण पत्र मिला है, गाड़ी की स्टेयरिंग कभी नहीं पकड़ाई गई। ऐसे में 1 करोड़ 20 लाखा रूपए कहां गए।
प्रिंसपल ने दिया गोलमोल जवाब
इस संबंध में जब आईटीआई प्रिंसपल नाहर सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, और गोलमोल बातें करते रहे। कहा कि शासन को स्थिति से अवगत कराया गया है। नए वाहन की डिमांड की गई है।
भविष्य के साथ कर दिया खिलवाड़
सोंचिए जरा जिन 1920 छात्रों को इस केंद्र से मोटर ड्राविंग का प्रमाण पत्र जारी किया गया है, उनके भविष्य के साथ कितना भद्दा खिलवाड़ किया गया। हैरानी इस बात की हो रही है कि वे 1920 प्रमाण पत्र धारी किस तरह अपना जीवन यापन कर रहे होंगे, जिन्होंने कभी स्टेयरिंग भी नहीं थामी है।
गाड़ी चली नही तो कहां खर्च हो गए 1 करोड़ 20 लाख
जिस मैटाडोर से मोटर ड्राइविंग सिखने की बात की जा रही है, वो तो वर्षों से खराब पड़ी है, और जिन छात्रों ने यहां से ट्रेनिंग ली है, उन्हें सिर्फ प्रमाण पत्र मिला है, गाड़ी की स्टेयरिंग कभी नहीं पकड़ाई गई। ऐसे में 1 करोड़ 20 लाखा रूपए कहां गए।
प्रिंसपल ने दिया गोलमोल जवाब
इस संबंध में जब आईटीआई प्रिंसपल नाहर सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, और गोलमोल बातें करते रहे। कहा कि शासन को स्थिति से अवगत कराया गया है। नए वाहन की डिमांड की गई है।

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