सत्येन्द्र खरे
यूपी के कौशाम्बी जिले में नेशनल पोलियो सर्विलांस प्रोजेक्ट से जुड़े एक डाक्टर ने पोलियो से मिलते जुड़ते लक्षण वाली बच्ची को सामने ला कर स्वास्थ्य महकमे की नीद उड़ा दी है | 19 जनवरी को सामने आये इस मामले पर अभी भी स्वास्थ्य महकमे के बड़े अधिकारी टेस्ट रिपोर्ट के इन्तजार में ही हाँथ पर हाँथ धरे बैठे है |
नगर पंचायत चायल के वार्ड नंबर 1 घूरी डीह गाव में रहने वाले भोला सरोज और कुशुम बेहद गरीब है | कच्चे मकान में झोपड़ी के सहारे जिन्दगी की गाडी भोला मजदूरी के सहारे खीच कर चला रहे है | आर्थिक संकट के बीच भी परिवार बेहद खुश था, लेकिन एक हफ्ते पहले 23 जनवरी को अचानक उनकी ढाई साल की बेटी राधिका अचानक खेलते खेलते जमीन गिर पड़ी | बेटी राधिका के गिरने बदहवास माँ कुशुम ने उसे गोद में उठा लिया, लकिन कुशुम ने अपनी बेटी को कुछ देर बाद दोबारा जमीन पर खड़ा करना चाहा तो वह अपने पैरो पर खड़ी नहीं हो सकी | इस बात से हैरान राधिका की माँ ने अपने देवर राम सुन्दर से बेटी की हालत की जानकारी दी | जिस पर वह दोनो राधिका को लेकर नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुचे | जहाँ के डाक्टरों ने प्रारभिक जाँच कर उन्हें बिना सही जवाब दिए घर जाने के लिए वापस कर दिया | 19 जनवरी के बाद लगातार पीड़ित बेटी को लेकर परिवार सरकारी डाक्टरों के पास चक्कर लगाते रहे, लेकिन डाक्टरों ने बेटी के इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं की |
राधिका के चाचा राम सुन्दर बताते है कि राधिका को अचानक हुयी अनजान बिमारी से पूरा परिवार सकते में आ गया | पीड़ित बेटी को लेकर भोला और उसका भाई राम सुन्दर वर्ल्ड हेल्थ सेंटर के नेशनल पोलियो सर्विलांस प्रोजेक्ट से जुड़े डाक्टर एचएल मिश्रा के पास पहुचे | जहाँ डाक्टर मिश्रा ने राधिका के डाक्टरी परिक्षण में पोलियो जैसे दिखने वाले विषाणु मिलने की बात कही | डॉ मिश्रा के मुताबिक राधिका के मामले में कौशाम्बी का स्वास्थ्य महकमा बेहद लापरवाही भरा कदम उठा रहा है | महकमे के बड़े जिम्मेदार डाक्टर अपनी गर्दन बचाने के लिए राधिका की स्टूल रिपोर्ट में गड़बड़ी करने की तैयारी कर रहे है |
डॉ एच एल मिश्रा, नेशनल पोलियो सविलांस प्रोजेक्ट के सदस्य, डब्लूएचओ
राधिका की हालत और नेशनल पोलियो सर्विलांस प्रोजेक्ट ने सदस्य डाक्टर के उठाये सवाल का जवाब जब हमने पोलियो उन्मूनल के प्रभारी अधिकारी डाक्टर इन्द्रमणि पाण्डेय से सवाल किया | जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि राधिका का मामला उनके जानकारी में 24 जनवरी को आया था | जिसके सही कारणों पता लगाने के लिए बच्ची का स्टूल नमूना जाँच के लिए भेजा गया है | जिसकी रिपोर्ट आने से पहले वह किसी भी नतीजे पर नहीं पहुच सकते है | लिहाजा उनके पास राधिका के मामले में हाँथ पर हाँथ रख कर बैठने के आलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है |



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