सत्येन्द्र खरे
यूपी बोर्ड की परीक्षाए सोमवार से शुरू हो रही है | परीक्षा की सुचिता को लेकर खुद सीएम योगी और डिप्टी सीएम कई बार अपने भाषणों में दावा कर चुके है , लेकिन सरकारी अफसर नक़ल विहीन परीक्षा के दावे को पलीता लगाने के कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे है | लालफीता शाही सरकारी अफसरों की कारगुजारी की पोल खोलती एक रिपोर्ट डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के गृह जनपद कौशाम्बी जिले से सामने आई है ..... मामला सिराथू तहसील में बनाये गए एक ऐसे परीक्षा केंद्र से जुड़ा है, जिसकी बुनियादी मान्यता पर ही खुद जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी जाँच रिपोर्ट में सवाल खड़ा कर चुके है |
माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड की परीक्षा से चंद घंटे पहले सामने आये इस पूरे मामले का खुलासा, दरअसल उस समय हुआ,.... जब कौशाम्बी के जिला विद्यालय निरीक्षक संतेंद्र कुमार सिंह को मुख्यमंत्री योगी के दफ्तर से एक शिकायती पत्र जाँच के लिए मिला | जिसमे तुलसीपुर गाव के अनुराग मिश्रा ने आरोप लगाया था कि 600 परीक्षार्थियों की बोर्ड परीक्षा के लिए बना केंद्र जाली अभिलेखों के आधार पर बना दिया गया है | अनुराग मिश्रा का आरोप है कि परीक्षा केंद्र बनाये जाते समय पंडित श्याम नारायण रामचंद्र इंटरमीडिएट कालेज के प्रबंध तंत्र ने जाली दफ्तावेज लगाये है | शिकायत कर्ता का यह भी आरोप है कि कालेज का जो दस्तावेज परीक्षा केंद्र बनाने के लिए बोर्ड को भेजा गया है उसमें कालेज को मान्यता साल 2001 में ही मिलना दिखाया गया है , जबकि कालेज अस्तित्व में साल 2005 में आया है | इसके साथ ही कालेज मान्यता के बुनियादी मानक को भी नहीं पूरा करता है |
24 जनवरी को सीएम योगी को भेजे गए शिकायती लेटर में मुख्यमंत्री दफ्तर ने डीएम कौशाम्बी से जाँच रिपोर्ट तलब की | जिसके बाद शुरू हुयी जाँच में शिकायत करने वाले युवक अनुराग के आरोपों की पुष्टि सिराथू के एसडीएम की जाँच रिपोर्ट में हुयी | जिसको एसडीएम सिराथू से अपनी जाँच रिपोर्ट में दर्शाया है कि परीक्षा केंद्र ''पंडित श्याम नारायण रामचंद्र इंटरमीडिएट कालेज'' के प्रबंध तंत्र ने साल 2005 में कालेज के नाम पर जमीन खरीदी है | एसडीएम सिराथू की जाँच रिपोर्ट के बाद खुद कौशाम्बी के जिला विद्यालय निरीक्षक ने अपने दफ्तर के दफ्तावेजो की जाँच में पाया कि कालेज की मान्यता जमीन खरीदे जाने से पहले ही साल 2001 में ही जाली दस्तावेजो के जरिये हाशिल कर ली गई थी | डीआईओएस सतेन्द्र कुमार सिंह के मुताबिक एसडीएम की जाँच रिपोर्ट के आधार पर कालेज का अस्तित्व जिस जमीन पर है वह साल 2005 में खरीदी गई, जबकि कालेज को मान्यता साल 2001 में ही मिल गयी थी | इस पूरे मामले के सामने आने के बाद उन्होंने परीक्षा केंद्र प्रबंधन की कारगुजारी की रिपोर्ट डीएम मनीष वर्मा समेत यूपी बोर्ड की सचिव को भेजकर आगे की कार्यवाही की अनुमति मांगी है,... लेकिन उन्हें अभी तक आगे की कार्यवाही के निर्देश नहीं मिले है | इस परीक्षा केंद्र में तकरीबन 600 परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठना है |
वीडियो बयान :सतेन्द्र कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, कौशाम्बी
यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या के गृह जनपद कौशाम्बी की गिनती विकास के मायने में सबसे पिछड़े जिलो में होती है , लेकिन बोर्ड की परीक्षा के समय जिले का यही पिछड़ापन नक़ल माफियाओ के लिए वरदान साबित होता है | ऐसे में नक़ल की मंडी के रूप में विख्यात कौशाम्बी में परीक्षा की सुचिता बनाये रखना बड़ा सवाल है | यह सवाल तब और अहम हो जाता है जब नक़ल विहीन परीक्षा कराने में लगे बड़े अफसरों ने ही अपने निजी फायदे के लिए ऐसे निजी कालेजो में परीक्षा कराने की अनुमति दी हो.... जो एग्जाम सेंटर होने के बुनियादी दस्तावेजो में ही हेरा-फेरी परीक्षा केंद्र बनाये गए हो |



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