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प्रदेश के किसी भी जिले में एसपी पद पर नहीं है मुस्लिम आईपीएस की तैनाती : वसीम


मुस्लिम आईपीएस को जिलों में तैनाती दिए जाने की मांग को लेकर वसीम ने सीएम को लिखा पत्र
जिलों के थानों और कोतवालियों में भी आरक्षण के मुताबिक तैनाती की मांग 
ए. आर. उस्मानी 
गोण्डा। आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि जिलों में मुस्लिम पुलिस कप्तान को कोटे के हिसाब से तैनाती दी जाए। उन्होंने कहा है कि पूरे प्रदेश में एक भी जिले में मुस्लिम आईपीएस की तैनाती नहीं की गई है। इससे संविधान द्वारा प्राप्त आरक्षण का मखौल तो उड़ ही रहा है, साथ ही बीजेपी सरकार के "सबका साथ, सबका विकास" नारे पर भी सवालिया निशान लग रहा है। 
        आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने सूबे के सीएम को पत्र लिखा है जिसमें मुस्लिम समाज के आईपीएस अधिकारियों को जिलों में तैनाती दिए जाने की मांग की है। वसीम ने मुसलमानों के साथ सरकार द्वारा किए जा रहे भेदभावपूर्ण रवैया की बात करके सूबे की सियासत को गर्म कर दिया है। इसके साथ ही श्री राईन ने विपक्ष को भी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरने का मौका दे दिया है। पत्र में प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने लिखा है कि पूरे प्रदेश में एक भी मुस्लिम पुलिस कप्तान समेत आईजी व डीआईजी स्तर के पद पर किसी भी मुस्लिम अधिकारी को नियुक्त नहीं किया गया है। देखा जाये तो पसमांदा मुस्लिम महाज पहले से ही पसमांदा मुस्लिम आबादी के हिसाब से राजनैतिक हिस्सेदारी की मांग मुख्यमंत्री से कर चुका है। अब मुस्लिम पुलिस कप्तान को कोटे के हिसाब से जिलों में तैनाती दिए जाने की मांग से मुद्दा भी बड़ा दिखाई दे रहा है। श्री राईन ने मुस्लिम कोटे के हिसाब से प्रदेश के जिलो में पुलिस कप्तान नियुक्त किये जाने की मांग मुख्यमंत्री से की है। इसके साथ ही जिलों के थानों और कोतवालियों पर भी आरक्षण के मुताबिक मुस्लिम समाज के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टरों की तैनाती की भी मांग की है। उन्होंने कहा है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि वह मुसलमानों के साथ भेदभाव नहीं करती है। साथ ही यह भी जोड़ा कि जब तक इस समाज के अधिकारियों की जिलों और थानों व कोतवालियों में तैनाती नहीं की जाती, तब तक यही माना जाएगा कि बीजेपी हुकूमत में मुस्लिमों के साथ ही इस बिरादरी के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ भी भेदभाव किया जा रहा है।
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