लम्बित शिकायती व आवेदन पत्रों को दस दिन में निपटाएं बैंक : डीएम
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। सभी बैंक किसानों का केसीसी बनाना शुरू कर दें तथा उद्योग आदि लगाने के लिए लम्बित आवेदनों को दस दिन के भीतर निपटाकर रिपोर्ट एलडीएम व उन्हें भी दें। इसके अलावा फसली ऋण मोचन योजना के तहत आन लाइन प्राप्त शिकायतों के सम्बन्ध में सभी बैंक अपनी स्पष्ट आख्या पांच मार्च तक हर हाल में दे दें जिससे पात्र किसानों को भी कर्जमाफी योजना का लाभ दिया जा सके। यह निर्देश जिलाधिकारी जेबी सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार/समीक्षा समिति की बैठक में सभी बैंक अधिकारियों को दिए हैं।
जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने बैंकवार ऋण जमा अनुपात, वार्षिक ऋध योजना 2017-18 की प्रगति, एनुअल आडिट पलन 2017-18, प्राथमिकता क्षेत्र एवं कमजोर वर्गों को ऋण वितरण की समीक्षा, जनपद में बैंक शाखाओं के विस्तार, किसान क्रेडिट र्काउ जारी करने, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड अप इंडिया की प्रगति तथा रोजगार हेतु बैंकों द्वारा ऋण देने की समीक्षा की गई। समीक्षा में ज्ञात हुआ कि बैंकों के स्तर पर तमाम विभिन्न योजनाओं के तहत स्वरोजगार, उद्यम, केसीसी तथा अन्य कई प्रकार के आवेदन काफी संख्या में लम्बित हेैं जिन के सम्बन्ध में बैंकों द्वारा कोई कार्यवाही न करते हुए आवेदन लम्बित हैं। जिलाधिकारी ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए सभी बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हें कि वे सब आवेदनों की पात्रता की जांच कर अतिशीघ्र पात्र आवेदको ऋण उपलब्ध करा दें तथ अपात्र आवेदकों को भी उनका आवेदन निरस्त किए जाने की सूचना व कारण भी बता दें जिससे आवेदक अनायास परेशान न हो। केसीसी की समीक्षा के दौरान ज्ञात हुआ कि वर्ष 2017 जनवरी से लेकर दिसम्बर 2017 तक लक्षित 60541 केसीसी के सापेक्ष बेैंकों द्वारा 26342 किसानों का केसीसी बनायी गई जिसके सापेक्ष किसानों को 51797.81 लाख रूपए बतौर केसीसी लोन दिए गए। समीक्षा बैठक में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने की योजना पर गहन चर्चा भी की गई। जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सब किसानों, उद्यमियों की फाइलों को कतई न लम्बित न रखें तथा आवेदनों के सम्बन्ध पात्रता व अपात्रता का कारण स्पष्ट करते हुए स्वीकृति अथवा निरस्तीकरण की कार्यवाही करें जिससे किसान व उद्यमी कतई परेशान न हों। इसके अलावा प्रदेश व केन्द्र सरकार की तमाम लाभार्थीपरक योजनाओं के भी लम्बित आवेदनों को जो कि किन्हीं कारणों से बैंकों के स्तर पर लटके हुए उनको भी दस दिनों के भीतर निस्तारित करते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी, सीडीओ व सम्बन्धित को प्रतिलिपि कर सूचना देगें। समीक्षा बैठक में वार्षिक ऋण योजना 2018-19 के निर्धारण पर विचार करते हुए कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण आदि को बढ़ावा देने पर निर्णय लिया गया। इसी प्रकार आरसेटी के माध्यम से ग्रामीण अंचल के लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण निःशुल्क दिलाने तथा प्रशिक्षण के उपरान्त उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगार शुरू करने के लिए बैंक से सहायता दिलाने पर भी चर्चा की गई।
बैठक में सीडीओ गोण्डा दिव्या मित्तल, एलडीएम गोण्डा, जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी वर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरपी यादव, जिला कृृषि अधिकारी विनय सिंह, कौशल विकास मिशन समन्यवक प्रदीप मिश्र सहित सभी बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने बैंकवार ऋण जमा अनुपात, वार्षिक ऋध योजना 2017-18 की प्रगति, एनुअल आडिट पलन 2017-18, प्राथमिकता क्षेत्र एवं कमजोर वर्गों को ऋण वितरण की समीक्षा, जनपद में बैंक शाखाओं के विस्तार, किसान क्रेडिट र्काउ जारी करने, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं स्टैण्ड अप इंडिया की प्रगति तथा रोजगार हेतु बैंकों द्वारा ऋण देने की समीक्षा की गई। समीक्षा में ज्ञात हुआ कि बैंकों के स्तर पर तमाम विभिन्न योजनाओं के तहत स्वरोजगार, उद्यम, केसीसी तथा अन्य कई प्रकार के आवेदन काफी संख्या में लम्बित हेैं जिन के सम्बन्ध में बैंकों द्वारा कोई कार्यवाही न करते हुए आवेदन लम्बित हैं। जिलाधिकारी ने प्रकरण का संज्ञान लेते हुए सभी बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हें कि वे सब आवेदनों की पात्रता की जांच कर अतिशीघ्र पात्र आवेदको ऋण उपलब्ध करा दें तथ अपात्र आवेदकों को भी उनका आवेदन निरस्त किए जाने की सूचना व कारण भी बता दें जिससे आवेदक अनायास परेशान न हो। केसीसी की समीक्षा के दौरान ज्ञात हुआ कि वर्ष 2017 जनवरी से लेकर दिसम्बर 2017 तक लक्षित 60541 केसीसी के सापेक्ष बेैंकों द्वारा 26342 किसानों का केसीसी बनायी गई जिसके सापेक्ष किसानों को 51797.81 लाख रूपए बतौर केसीसी लोन दिए गए। समीक्षा बैठक में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने की योजना पर गहन चर्चा भी की गई। जिलाधिकारी ने बैंक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सब किसानों, उद्यमियों की फाइलों को कतई न लम्बित न रखें तथा आवेदनों के सम्बन्ध पात्रता व अपात्रता का कारण स्पष्ट करते हुए स्वीकृति अथवा निरस्तीकरण की कार्यवाही करें जिससे किसान व उद्यमी कतई परेशान न हों। इसके अलावा प्रदेश व केन्द्र सरकार की तमाम लाभार्थीपरक योजनाओं के भी लम्बित आवेदनों को जो कि किन्हीं कारणों से बैंकों के स्तर पर लटके हुए उनको भी दस दिनों के भीतर निस्तारित करते हुए रिपोर्ट जिलाधिकारी, सीडीओ व सम्बन्धित को प्रतिलिपि कर सूचना देगें। समीक्षा बैठक में वार्षिक ऋण योजना 2018-19 के निर्धारण पर विचार करते हुए कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण आदि को बढ़ावा देने पर निर्णय लिया गया। इसी प्रकार आरसेटी के माध्यम से ग्रामीण अंचल के लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण निःशुल्क दिलाने तथा प्रशिक्षण के उपरान्त उन्हें आत्मनिर्भर एवं रोजगार शुरू करने के लिए बैंक से सहायता दिलाने पर भी चर्चा की गई।
बैठक में सीडीओ गोण्डा दिव्या मित्तल, एलडीएम गोण्डा, जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी वर्मा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरपी यादव, जिला कृृषि अधिकारी विनय सिंह, कौशल विकास मिशन समन्यवक प्रदीप मिश्र सहित सभी बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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