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शासनादेश को दरकिनार कर अव्यवस्थाओं के बीच शुरू हुई स्नातक परीक्षा


अखिलेश्वर तिवारी
जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को मजबूर हैं स्नातक छात्र
बलरामपुर ।। सिद्धार्था विश्वविद्यालय अन्तर्गत जनपद बलरामपुर के महाविद्यालयों मैं आज से स्नातक की परीक्षाएं शासनादेश को दरकिनार करते हुए तमाम अब्यवस्थाओं के बीच शुरू हो गई हैं । शासन के दिशा निर्देशों को एक ओर जहां निजी विद्यालय अच्छरशः पालन कर रहे हैं वहीं सरकारी सहायता प्राप्त कुछ विद्यालय शासनादेशों की अनदेखी भी कर रहे हैं । परीक्षा के पहले दिन की पड़ताल में कई सारी विसंगतियां सामने दिखाई दीं । उच्चतर माध्यमिक संस्कृत विद्यालय में चल रही स्नातक की परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को जमीन पर मैट बिछाकर बिठाया गया था । यहां पर किसी भी कमरे में सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था नहीं है । प्रधानाचार्य अनुराग मिश्र की माने तो उनके पास कैमरे लगाने के लिए फंड नहीं है । शासनादेश है कि परीक्षा वही कराई जाए जहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं तो फिर किस नियम के तहत इस विद्यालय को परीक्षा केंद्र बनाया गया यह सोचनीय विषय है ? वहीं महारानी लाल कुंवरि स्नातकोत्तर महाविद्यालय तथा सिटी मांटेसरी गर्ल्स डिग्री कॉलेज मे परीक्षाएं शासनादेश के अनुरूप चलती हुई पाई गई यहां पर संचालित हो रहे परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं तथा सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में ही परीक्षाएं संचालित कराई जा रही हैं । गौरतलब है कि योगी सरकार बनने के बाद प्रदेश की बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए नकल विहीन परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था जिसके अंतर्गत सभी परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का निर्देश जारी कर दिया गया है । इसके बावजूद जनपद बलरामपुर मे बगैर सीसीटीवी कैमरे वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया । नकलविहीन परीक्षा कराए जाने के शासनादेश का मेधावी छात्रों द्वारा एक स्वर में स्वागत किया जा रहा है । 


मानसी शुक्ला  अनामिका सिंह आंचल मिश्रा ममता सहित तमाम छात्राओं की माने तो नकल होने से उनकी प्रतिभा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था । नकल करने वाले छात्र टॉप कर रहे थे वहीं मेहनत कर पढ़ाई करने वाले छात्र पीछे छूट जा रहे थे । अब योगी सरकार के आदेश पर कराई जा रही नकल विहीन परीक्षा से मेधावी छात्रों को काफी आस बंधी है और अब वही छात्र पास होगा जिसने वास्तव में पढ़ाई की है । इस व्यवस्था से योग छात्र-छात्राएं  आगे बढ़ेंगे  और स्वस्थ  भारत का निर्माण हो सकेगा । परंतु उन परीक्षा केंद्रों का  क्या होगा  जहां पर  शासनादेश के अनुसार परीक्षाएं नहीं संचालित कराई जा रही हैं कहीं ना कहीं  परीक्षा केंद्रों पर नकल विहीन परीक्षा कराने का दावा खोखला साबित होगा  ।

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