राजकुमार शर्मा
बहराईच:-सीमावर्ती जिला बहराईच की एक रोचक कहानी। जीवन दो विपरीत ध्रुवों के बीच गतिमान रहता है। सुख और दुःख , लाभ और हानि, यश और अपयश तथा जीवन और मृत्यु ये कभी अलग न होंने वाले दो किनारे है। सुख के समय मे आनंद और उल्लाश, हँसी और कोलाहल जीवन मे छा जाते है तो दुःख में मनुष्य निराश होकर रुदन करता है। निराशा के क्षणों में बोझ और दुःख को भुलाने के लिए वह उन मादक द्रव्यों जैसे गांजा, भांग, अफीम, चरस , ड्रग्स, शराब आदि का सहारा लेता है। जो उसे दुखो की स्मृति से दूर बहा ले जाते है। यह ही मादक द्रव्य है जो नशा कहे जाते है। मादक द्रव्यों को लेने के लिए आज के दौर में युवाओं में न केवल असफलता और निराशा ही कारण नही बने है अपितु रोमांच पाश्चात्य दुनिया की नकल और नशे के व्यापारियों की लालची प्रवृत्ति भी इसमें सहायक होती दिख रही है। इसी क्रम में यदि विकाश खंड नवाबगंज की बात किया जाय तो यह विकाश खंड सायद जिले नही बल्कि प्रदेश अस्तर पर अव्वल निकलेगा। यह क्षेत्र सीमावर्ती क्षेत्र है जहाँ पड़ोसी देश नेपाल विद्यमान है। जहाँ पर एक कहवात प्रचलित है ''सूर्य अस्त नेपाल मस्त" अर्थात सूर्य के ढलते ही लोगो मे नशा करने की होड़ लग जाती है यहाँ अधिकतर लोग अल्कोहल का सेवन करते दिखाई देते है। जिसका सीधा प्रभाव इस विकाश खंड क्षेत्र पर पड़ता है। रुपईडीहा, नई बस्ती, चकिया रोड, बाबागंज, जमोग चरदा, नवाबगंज, जंगल क्षेत्र आदि अनेको अनेक स्थान है जहाँ नशा व्यापारी सक्रिय रूप से कम करते दिख रहे है। लिहाजा कई बार समय समय पर पुलिस ने अपनी पुलिशिया कार्यवाही करते हुए अभियुक्तों को ग्रिफ्तार किया। और जेल भी रावाना किया। परंतु इसके बाद भी स्थिति में कोई प्रभाव नही दिखता नज़र आ रहा है। कई बार एस०एस० बी० जवानों ने भी चरस, अफीम, देसी कर्णाली शराब बरामद किया परंतु इन दिनों यह यहाँ सब बिकना तो आम बात होता दिख रहा है कही ट्रेन तो कही जंगल नशा व्यापारी तो अपना रास्ता खोज ही लेते है। कई बार इसी नशे की लत ने दर्जनो लोगो की जान तक ले ली है। परंतु नशा व्यापारियों पर सायद कुछ प्रभाव नही पड़ता! इतना ही नही इस क्षेत्र में मौजूद कई मेडिकल स्टोर भी ड्रग्स विक्री पर अपनी रोजी रोटी जोड़ रखे है। कुछ दिन पहले ड्रग्स इस्पेक्टर ने औचक कार्यवाही की तो कई मेडिकल स्टोर पर मादक पदार्थ पकड़े गये। जिससे उस समय कुछ हद तक कंट्रोल दिखा परंतु पुनः वे सक्रिय हो गए। जब गुप्त चुप तरीके से एक मेडिकल स्टोर से जानकारी हासिल की तो उसने कहा यदि हम इससे न बेचे तो हमारा मेडिकल कैसे चलेगा। अर्थात ड्रग्स विक्री ही यहाँ की मुख्य बिंदु है । चरस, गांजा, अफीम, ड्रग्स आदि अनेको अनेक घातक अल्कोहल जो जीवन को समाप्त करने का ज्वलंत उदाहरण है। वह इस क्षेत्र का सक्रिय व्यापार है। इस क्षेत्र में इसका यदि प्रमाणित तथ्य खोजा जाए तो थाना, कोतवाली एस एस बी बटालियन ही उसका व्यय करती व कागजातों को खंगालने से पता चल सकता है। यही कई ग्रामीणी इलाका है जहाँ पर नसेड़ी न केवल नशा करते दिखते है अपितु रात्रि में राहगीरो की साइकिल चोरी करने आदि अनेको अनेक घटनाओं को भी अंजाम देते दिखते है। परंतु वे घटना को अंजाम दे कर चम्पत हो जाते है। अर्थात यह प्रकरण इन दिनों इस क्षेत्र के लिए महामारी जैसे भायाव बीमारी की तरह चारो तरफ फैलती नजर आती है।गौरतलब हो कि भारत जैसे विकाशशील देशो में इस प्रकार की प्रवृति देश घाती होती है। और युवा शक्ति को रचनात्मक कार्यो के प्रति प्रोत्साहित करना कठिन हो जाता है। अतः परिवार देश और समाज सभी के सहयोग से ऐसे दिशाहीन युवकों को सुमार्ग पर लाने का काम किया जा सकता है। शराब जैसे नशीले पदार्थ का प्रचलन तो समाज मे बहुत पहले से ही था। परंतु आधुनिक युग मे पश्चात संस्कृत से नशे को नए रूप मिलते हुए दिख रहे है। मार्फिन , हेरोइन तथा कोकीन जैसे संवेदन मादक पदार्थ इनके उदाहरण है। इन नशे के व्यवसाय के पीछे आज अनेको बड़े व्यापारी माला-माल होने में लगे हुए है।
क्या होता है दुष्प्रभाव
नासिले पदार्थ स्नायु तंत्र को प्रभावित करते है। और इससे व्यक्ति उचित, अनुचित, भले बुरे की चेतना खो देता है। उसके अंग प्रत्यंग शिथिल हो जाता है वाणी लरखने लगती है शरीर मे कंपन होने लगता है, आंखे आ सामान्य हो जाती है।
कैसे कैसे है नशीले पदार्थ
नशीले पदार्थो में आज तम्बाकू भी मन जाता है । क्योंकि इससे शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।लेकिन विषेष रूप से जो नशा आज के युग मे यहाँ ब्याप्त है उसमें चरस ,गांजा, भांग, अफीम , स्मेक, हीरोइन, ड्रग्स, शराब आदि एक तरह का जहर है। जो इस क्षेत्र मे महामारी की तरह फैला हुआ है।
ज्ञात हो कि शराब की लत पारिवारिक ,शारीरिक,सामाजिक और आर्थिक सभी स्तरों पर अपना कु प्रभाव दिखाती है। इससे व्यक्ति में स्नायु संस्थान प्रभावित होते है । निर्णय,और नियंत्रण शक्ति कमजोर होती है। आमाशय ,लिवर और हिर्दय प्रभावित होते है। इसी तत्व के कारण कही सड़क दुर्घटना में अनमोल जाने चली जाती है फिरभी सरकार इस प्रकरण पर कोई ठोस कदम क्यो नही उठाती है ।इस दुसप्रवित्र को रोकने के लिए सरकार और जनता दोनों को सक्रिय सहयोग ही सफल हो सकता है। सरकार में भ्रष्ट लोगो और अधिकारी जो इस अपराध में भागीदार होते है को कड़ी सजा दी जाए तो जनता के लिए यह एक उदाहरण और भय का कारण बन जायेगा।बड़े से बड़े गिरोह और व्यापारियों को भी कड़े दंड दिए जाने आवश्यक है। कढोर कानून बनाना और कठोरता से उनका पालन करना इन दिनों नित्यन्त आवश्यक है ।दोसी व्यक्ति को किसी भी रूप में चाहे वह कोई हो छमा नही किया जाना चाहिए। इस नशे में प्रवित्र लोगो को सहानुभूति और प्यार के द्वारा ही धीरे धीरे रास्ता पर लाया जा सकता है। उनकी मां स्थिति को बदलने और उन्हें सबल बना कर व नशा विरोधी केंद्र का सहारा लेते हुए नशा उन्मूलन की कार्यवाही करना इस क्षेत्र के लिए एक गॉड गिफ्ट जैसा सावित हो सकता है।


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