शिवेश शुक्ला
प्रतापगढ़। जनपद के लालगंज विकासखण्ड के ब्लाक प्रमुख उप चुनाव के तहत बुधवार को प्रत्याशियों ने समर्थकों के लाव लश्कर सहित अपने अपने नामांकन पत्र दाखिल किये। निर्वाचन अधिकारी एसडीएम सदर पंकज वर्मा के समक्ष प्रत्याशियों ने प्रस्तावक व समर्थक के साथ नामांकन पत्र पेश किया। कांग्रेस समर्थित कैथौला के बीडीसी सुरेंद्र सिंह के समर्थन मे चार सेट मे नामांकन पत्र प्रस्तुत किया गया। सुरेंद्र के प्रस्तावकों मे केडी मिश्र, चंद्रमौलि शुक्ल, हियात, अर्जुन, श्याम नारायण सिंह आदि रहे। वहीं नामांकन के समय सुरेंद्र के साथ ब्लाक गेट तक पार्टी कार्यकर्ताओं का भी भारी हुजूम देखा गया। इनमें सांसद प्रमोद तिवारी के प्रतिनिधि भगवती प्रसाद तिवारी, राममिलन तिवारी व मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश शुक्ल, चेयरमैन प्रतिनिधि संतोष द्विवेदी प्रमुख रहे। इधर भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप मे पूर्व प्रमुख रमेश प्रताप सिंह ने अपना नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया। रमेश प्रताप सिंह के प्रस्तावक के रूप मे रायपुर भगदारा के बीडीसी भानु प्रताप व पूरे इच्छाराम की सुमित्रा रहीं।
वहीं रमेश के नामांकन मौके पर भाजपाईयों का काफिला गेट तक देखा गया। इस मौके पर राकेश सिंह, राममोहन सिंह व नागेश प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद बेलहा तृतीय के बीडीसी सदस्य जितेन्द्र बहादुर सिंह ने भी दोपहर बाद अपना नामांकन पत्र एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया। जितेन्द्र के प्रस्तावकों मे अर्जुनपुर व देवापुर के बीडीसी प्रशान्त तथा महिमापुर के राकेश सरोज रहे। नामांकन दाखिले को लेकर जहां सियासी मौसम मे खास सरगर्मी देखी गयी। वहीं प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिये ब्लाक परिसर मे कड़ा पुलिसिया पहरा बैठा रखा था। एसडीएम लालगंज/जोनल मजिस्ट्रेट कोमल यादव तथा सीओ ओपी द्विवेदी ने ब्लाक कैम्पस मे व्यवस्था को पारदर्शी बनाये रखने के लिये खुद कमान संभाले दिखे। वहीं तहसीलदार ओमप्रकाश पाण्डेय व कोतवाल तुषार दत्त त्यागी तथा संग्रामगढ़ थानाध्यक्ष जेपी उपाध्याय भी भारी पुलिस फोर्स के साथ बाहरी तथा अंदरूनी सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने मे मशक्कत करते दिखे। कैम्पस मे बड़ी संख्या मे महिला पुलिस का दस्ता भी तैनात देखा गया। कांग्रेस एवं भाजपा समर्थित प्रत्याशियों के नामांकन सकुशल दाखिल हो जाने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। नामांकन के बाद लोगों मे सुरेंद्र सिंह व रमेश प्रताप सिंह दोनों के बीच खुली जंग की चर्चा भी देखी सुनी गई। बतादें जहां कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र सिंह प्रमुख पद का चुनाव पहले मतदान मे हार गये थे। वहीं भाजपा समर्थित रमेश प्रताप सिंह को भी अविश्वास प्रस्ताव मे पटखनी मिली हुई है। नामांकन के बाद विकासखण्ड के अगले प्रमुख को लेकर आम आवाम मे अटकलें तेज हो गयी है। वहीं दोनों खेमे बीडीसी सदस्यों को अपने पाले मे करने के लिये जुट गये है। इधर प्रशासन अब चुनाव प्रचार तथा मतदान प्रक्रिया को सकुशल सम्पन्न कराने के लिये रणनीतिक तैयारी को अंजाम देने मे भी दिनरात एक किये हुये दिखने लगा है।
सुप्रीम कोर्ट से भी स्थगन न मिलने से भाजपाई खेमे मे निराशा
रामपुर खास मे चुनाव कई मायनों मे हर बार दिलचस्प हुआ करता है। यहां के अभी तक होने वाले हर एक चुनाव न केवल प्रशासन के लिये चुनौती पूर्ण हुआ करते आये है। बल्कि सियासी गैलरी मे भी यह चुनाव सिर चढ़कर बोला करते है। ब्लाक प्रमुख के मौजूदा उप चुनाव को लेकर भी यहां सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। कांगे्रस के गढ़ मे ब्लाक प्रमुख का उप चुनाव सह और मात की कई मोर्चे पर जंग को परवान चढ़ाये दिख रहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से भी चुनाव स्थगन कराने मे भाजपा समर्थित प्रत्याशी की याचिका पर राहत न मिलने से सियासी खेमे मे उथलपुथल बढ़ गयी। कांग्रेस के साथ नामांकन के दिन ज्यादातर बड़ी संख्या मे जुटे बीडीसी सदस्यों की जमात मे अदालती रूख को सही ठहराते हुये आसन्न चुनाव मे अपनी एकतरफा हार देखते हुये भाजपा प्रत्याशी पर घर मे भी झटके के साथ कोर्ट से भी निराशाजनक परिणाम के तंज कसते देखे गये। कांग्रेस के दिग्गज प्रमोद तिवारी एवं मौजूदा विधायक आराधना मिश्रा मोना लालगंज ब्लाक पर भी केसरिया रंग चढ़ाने को आतुर है तो विपक्ष का खेमा चुनाव मे अदालती दखल तक की भरपूर पैरवी मे जुटा हुआ है। भाजपा समर्थित ब्लाक प्रमुख को कांग्रेसी खेमें के बीडीसी सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव लाकर पैदल कर दिया। इसके खिलाफ भाजपा समर्थित रमेश प्रताप सिंह हाईकोर्ट मे याचिका दाखिल कर चुके है। इस बीच हाईकोर्ट मे बात न बनती देख रमेश प्रताप सिंह याचिका पर फौरी राहत के लिये सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट मे भी प्रारंभिक बहस मे ही चुनाव स्थगन से मनाही को लेकर रमेश प्रताप सिंह व समर्थकों को बुधवार को झटका भी लगा। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के सुनवाई के लिये प्रारम्भिक अर्हता के तहत चुनाव प्रक्रिया रोकने से साफ मनाही करते हुये सिर्फ यूपी सरकार से हाईकोर्ट मे विचाराधीन याचिका का विधिक दृष्टिकोण ही चाहा है। हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट से भी राहत न मिलने पर अब मजबूरन रमेश प्रताप सिंह चुनावी मैदान मे कसरत करने पर विवश दिख रहे है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने रमेश की याचिका को भी सूबे की कई पंचायती चुनाव की याचिकाओं मे सम्बद्ध कर दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित सुरेंद्र सिंह के खेमे मे अदालती फैसले से माहौल खुशनुमा देखा गया। बीडीसी सदस्य एवं ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केडी मिश्र का कहना है कि रमेश सिंह को अब बीडीसी सदस्यों पर भरोसा नहीं रह गया है। इसीलिये वह चुनाव मे दखल के लिये न्यायालय मे अनावश्यक जा पहुंचे। जबकि सुरेंद्र सिंह का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव मे जिस तरह बीडीसी सदस्यों ने हमारे साथ एकजुटता दिखाई उससे परेशान रमेश प्रताप सिंह ने कोर्ट से चुनाव स्थगित कराने का प्रयास किया। किंतु न्यायालय ने भी न्याय प्रदान कर हमारा मनोबल बढ़ाया है।

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