लखनऊ। विश्व भोजपुरी सम्मलेन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा है किभार के बाद अब झारखंड की सरकार ने भी भोजपुरी को दूसरी दर्जा देकर इसे स्थापित कर दिया है। अब केंद्र सरकार भी जल्दी ही भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में स्थापना दे दे तो करोड़ो भोजपुरी भाषियों के लिए सुखद होगा।
झारखंड सरकार ने मगही, भोजपुरी, मैथिली और अंगिका को राज्य में द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने का फैसला लिया है। बिहार राजभाषा (झारखंड संशोधन) अध्यादेश 2018 के माध्यम से इन भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिया जाएगा। अध्यादेश के प्रारूप पर बुधवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पहले ही इसे सहराजभाषा का दर्जा दे चुकी है और बिहार सरकार की कैबिनेट ने भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का प्रस्ताव पारित कर अपनी सिफारिश केन्द्र सरकार को भेज दी है।पिछले वर्ष ही गृह मंत्रालय को भोजपुरी के समर्थन में भेजे अपने प्रस्ताव के साथ बिहार सरकार ने महाकवि तुलसीदास, कबीर से लेकर बाबा नागार्जुन की इस भाषा के प्रति स्नेह का हवाला भी दिया है। तो भोजपुरी की माटी के सपूत देश के पहले राष्ट्रपति डा राजेंद्र प्रसाद और संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की मातृभाषा को उचित समान देने की पैरोकारी की गई है। भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की बिहार कैबिनेट की सिफारिश को राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने शनिवार को केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया। इस सिफारिश के साथ बिहार सरकार ने भोजपुरी को मान्यता देने की मांग के औचित्य को भाषा के इतिहास, गौरव और इसकी माटी के विभूतियों का अपनी भाषा से जड़ाव के तथ्यों से भी केन्द्र को रुबरू कराया है।
बिहार और पूर्वी उत्तरप्रदेश की बडी आबादी के साथ झारखंड के अलावा मारीशस, सुरीनाम, त्रिनीदाद, टूबैगो, फीजी आदि देशों में भी भोजपुरी लोकप्रिय भाषा है। जिस भोजपुरी को अपने देश में आठवी अनुसूची में जगह नहीं मिल पा रही उसी भोजपुरी के लोकगीतों और सोहर को यूनेस्को ने संरक्षित करने का मन बना लिया है। मारीशश सरकार के उस प्रस्ताव को यूनेस्को ने स्वीकार कर लिया है जिसमे भोजपुरी लोकगीत और सोहर को संरक्षित करने की बात कही गयी है।

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