गाँव की पगडंडियों को, बैलों की घंटियों को
गन्ने के खेतों में बनी गुड़ की भट्ठियों को
सरसों के फूलों को सावन के झूलों को
पेड़ों की डालियों पर, नाचती बुलबुलों को
नववर्ष की नवबधाइयाँ।
खेत को खलिहान को, किसानों के व्यायाम को
उड़ते हुए पक्षियों के कलरव के तान को
हल के फालों को मेंहनतकश छालों को
अपने हक की खातिर उठते हुए सवालों को
नववर्ष की नव बधाइयाँ।
मंदिर की ड्योढ़ी पर घंटियों की टन-टन को
आँगन में ठुमकती हुई पायलों की छन-छन को
गुड्डे और गुड़ियों से खेलते हर बचपन को
चूल्हे की रोटियों और चूड़ियों की खन-खन को
नववर्ष की नव बधाइयाँ।
भारतीय संस्कार को, रिश्तों में प्यार को
आपके परिवार को, इस सम्पूर्ण संसार को
हिन्दू नववर्ष की नव बधाइयाँ।।
ज्योति त्रिपाठी(कवयित्री)


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