सुनील उपाध्याय
उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक तरफ गांव को खुले में शौच मुक्त करने में लगी हुई है वही बस्ती जिले में हरैया तहसील के शंकरपुर गांव में का नजारा कुछ और ही है इस गांव में शौचालय बने हैं लेकिन बकरियों के लिए जी हां चौंकिए नहीं हम बात कर रहे हैं साल 2014 में लोहिया ग्राम घोषित शंकरपुर की।
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लोहिया ग्राम घोषित होने के बाद सभी घरों में शौचालय के निर्माण का ठेका एक एजेंसी को दे दिया गया लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद भी न तो पूरी तरीके से शौचालय बन पाए हैं न ही दरवाजे लग पाए जो बने भी हैं उनका प्रयोग नहीं हो रहा है जब हमारी टीम ने गांव का जायजा लिया तो पता चला कि ठेकेदार द्वारा आधे अधूरे कामों को छोड़कर पूरा पेमेंट करा लिया। अब गांव वाले उन बने शौचालयों का प्रयोग भूसा रखने हैं या अपनी बकरियों को बांधने का काम कर रहे हैं जिले के अधिकारी भी इस मामले पर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। फिर भी जोर शोर से अधिकारी अधिकतर गांव को ओडीएफ घोषित करने में लगे हुए हैं। लेकिन यह तस्वीर इस अभियान की हकीकत कुछ और ही दिखाती है।


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