गोंडा;-भगवान घनश्याम महाराज की जन्म स्थली स्वामीनारायण मंदिर में बाल स्वरूप घनश्याम प्रभु की तीन दिवसीय बाल लीला कथा परायण का भव्य शुभारंभ पोथी यात्रा के साथ किया गया।मंदिर महंत ब्रम्हचारी स्वामी वासुदेवानंद जी महराज और ब्रम्हचारी स्वामी हरिस्वरूपा नंद महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान का पूजन कराया। व्यास पीठाधीश्वर कथा वाचन ब्रम्हचारी स्वामी शिवानंद जी महराज ने भगवान घनश्याम महराज के बाल लीलाओं का अद्भुत वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि प्रभु घनश्याम ने अपने भक्तों की रक्षा के लिए बाल्य काल से ही आसुरी शक्तियों का सामना किया।राक्षस कालीदत्त का वध कर समाज को उस आताताई के पाप से छुटकारा दिलाया।उन्होंने कहा कि गऊ घाट पर पानी के लिए तड़प रहे ग्वाल बालों जीव जंतुओं जल उपलब्ध कराया। उन्होंने अपने अंगूठे को धरती में दबा कर मां गंगा का आवाह्न किया। एक धारा निकली जिससें सभी की प्यास बुझी। कथा ब्यास ने भगवान के अनेक बाल लीलाओं का मार्मिक वर्णन कर हरिभक्तों को भाव विभोर कर दिया। महंत स्वामी ने कहा कि छपिया की माटी धन्य हैं कि भगवान ने यहां जन्म लिया है।
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अम्बा लाल भाई, चिराग भाई, माधव राम तिवारी, शैलेन्द्र तिवारी, राजा भगत, अयोध्या भाई, कल्पेश भगत, शान्ति लाल महराज, रमण भगत, देवानंद महेन्द्र भाई, राधेश्याम भाई, धर्मेश, प्रेम जी भाई, सांख्य योगी वेन हंसा, मोती बां, दाही बां सहित सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुष हरिभक्तों ने भाग लिया।



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