अखिलेश्वर तिवारी
बलरामपुर ।। जनपद बलरामपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक के विरुद्ध शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा और जिले के सभी शिक्षकों ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन करने का बहिष्कार कर दिया । आज से बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन पूरे प्रदेश में शुरू होना था और शायद बलरामपुर पहला जिला है जहां आज बोर्ड कापियों का मूल्यांकन शुरू नहीं हो सका । अंततः सांसद तथा विधायकों को मध्यस्ता कराने के लिए बीच में उतरना पड़ा । शिक्षक संघ के नेता अशोक पांडे व भगवती प्रसाद शुक्ला का कहना था कि जिला विद्यालय निरीक्षक हृदय नारायण त्रिपाठी शिक्षकों के समस्याओं को लेकर संवेदनशील नहीं है और हर कार्य के लिए उनके बाबूओं द्वारा पैसे की मांग की जाती है ।
मसलन पे ग्रेड वेतन बनाने के लिए 15 से ₹20000 की मांग की जाती है । सर्विस बुक पर हस्ताक्षर के लिए ₹500 की मांग की जा रही है । बर्ष 2016-17 के मूल्यांकन के भुगतान शासन द्वारा प्राप्त होने के बावजूद शिक्षकों को नहीं दिया गया । इसी प्रकार जो भी कार्य डीआईओएस कार्यालय से होते हैं सभी के लिए पैसे लिए बगैर कार्य नहीं किए जा रहे हैं जिसके चलते आज जिले के सभी शिक्षकों ने मूल्यांकन कार्य से बहिष्कार करने का फैसला लिया है । शिक्षकों ने मूल्यांकन अस्थल एम पी पी इंटर कॉलेज पर विरोध प्रदर्शन के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रभारी जिला अधिकारी कार्यालय का घेराव किया और जमकर हंगामा किया । कलेक्ट्रेट पहुंचे सांसद दद्दन मिश्रा , विधायक सदर पलटूराम व विधायक तुलसीपुर कैलाश नाथ शुक्ला शिक्षक संघ के नेताओं तथा अध्यापकों से वार्ता कर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरुण कुमार शुक्ला तथा अपर जिलाधिकारी न्यायिक के साथ बैठक कर मामले को सुलझाने का प्रयास किया परंतु शिक्षक डीआईओएस की बर्खास्तगी की मांग पर अड़े रहे । जिला विद्यालय निरीक्षक हृदय नारायण त्रिपाठी तमाम आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उनके स्तर पर कोई कार्यपेंडिंग नहीं रखा जा रहा है और जो भी कार्य पेंडिंग होंगे उसे तत्काल निस्तारित कर दिया जाएगा साथ ही उन्होंने अपने कार्यालय में अटैच 2 लिपिकों को हटाने पर भी अपनी सहमति जताई । समाचार लिखे जाने तक कोई समझौता नहीं हो सका था जिससे कयास लगाया जा रहा है कि यदि आज कोई समझौता नहीं हुआ तो मूल्यांकन कार्य दूसरे दिन भी शुरू नहीं हो सकेगा । प्रदर्शन करने वालों में जिले के सभी विद्यालयों के तमाम प्रधानाचार्य व शिक्षक सैकड़ों की संख्या में मौजूद थे सभी लोग एक स्वर में दिवस पर रिश्वत लेने तथा अध्यापकों के उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए आक्रोशित होकर नारेबाजी कर रहे थे ।
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