सुनील उपाध्याय
बस्ती । ऐसे समय में जबकि मानवीय संवेदनाओं का निरन्तर क्षरण हो रहा है साहित्य ही समाज को सही दिशा दे पाने में सक्षम है। करूणामयी समाज की संचेतना कविता में ही फूटती है। यह विचार साहित्यकार एवं जिला आबकारी अधिकारी अनुराग मिश्र ‘गैर’ ने डॉ. कान्चनमाला त्रिपाठी कृत ‘ गीतों का कोई मुहूरत नहीं’ काव्य संकलन के लोकार्पण अवसर पर पूर्वान्चल विद्वत परिषद द्वारा प्रेस क्लब में आयोजित समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
कहा कि डॉ. कान्चनमाला त्रिपाठी का बस्ती से निकट का रिश्ता है, उनके काव्य संसार में प्रेम, विरह, करूणा और मानवीय संवेदनाओं के साथ लोक प्रकृति जीवन्त हो जाती है। विशिष्ट अतिथि आयुष चिकित्सक एवं साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने काव्य संग्रह पर विस्तार से चर्चा करते हुये कहा कि उनके रचनासंसार का दर्शन, प्रदर्शन लोक अनुभवों से रचा बसा है। वे भविष्य के प्रति आश्वस्त करती हैं।
डॉ. कान्चनमाला त्रिपाठी ने कहा कि जिस प्रकार से विद्वतजनों ने उनके काव्य संग्रह को सराहा है उससे और बेहतर सृजन का साहस बढा है। उन्होने संग्रह में संकलित रचनाओं से मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर राजेन्द्रनाथ तिवारी, डॉ. कांचनमाला त्रिपाठी, अनुराग मिश्र ‘गैर’ डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ डा. वी.के. वर्मा, डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ ब्रम्हदेव त्रिपाठी पंकज, विनोद उपाध्याय, डॉ. ओम प्रकाश पाण्डेय, सत्येन्द्रनाथ ‘मतवाला’ को अंग वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया।
संचालन करते हुये ख्यातिलब्ध कवि डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि लोग साहित्य के प्रति समर्पित होते तो कठुआ जैसे हादसे सामने न आते। डॉ. कान्चनमाला त्रिपाठी का रचना संसार भावुक होने के साथ ही अति संवेदनशील है और डा. महादेवी वर्मा की स्मृतियों को भी स्वर देता है।
आयोजक विद्वत परिषद के महासचिव डा. ओमप्रकाश पाण्डेय ने आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कहा कि ‘ गीतों का कोई मुहूरत नहीं’ काव्य संकलन हमंें कई विन्दुओं पर सोचने को बाध्य करता है। विशेषकर स्त्री विमर्श कई रचनाओं में मुखरित हुआ है।
अध्यक्षता करते हुये विद्वत परिषद अध्यक्ष राजेन्द्रनाथ तिवारी ने साहित्य केे सन्दर्भ, उनके मानवीय आधार सहित अनेक विन्दुओं पर विस्तार से चर्चा किया। कहा कि साहित्य के बिना मनुष्य पशुवत है।
लोकार्पण के दूसरे चरण में डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन में डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ ब्रम्हदेव शास्त्री ‘पंकज’ अजय श्रीवास्तव ‘अश्क’ आतिश सुल्तानपुरी, हरीश दरवेश, सत्यदेव त्रिपाठी, विनोद कुमार उपाध्याय, सागर गोरखपुरी, जगदम्बा प्रसाद भावुक, पंकज सोनी, कलीम वस्तवी, पुष्पलता पाण्डेय आदि की रचनायें सराही गई।
कार्यक्रम में अशोक कुमार पाण्डेय, त्रिभुवन प्रसाद मिश्र, श्याम प्रकाश शर्मा, वसीम अंसारी, रममणि शुक्ल, भागवत प्रसाद श्रीवास्तव, ओम प्रकाशधर द्विवेदी, डा. आशा त्रिपाठी, ममता द्विवेदी, डा. रीता सिंह, सुनीता वर्मा, हरिकेश प्रजापति, डा. सर्वेष्ट मिश्र, अब्दुल मावूद, राजेश कुमार मिश्र, राकेश राही, राजेश सक्सेना, मोहित, अनिल श्रीवास्तव के साथ ही अनेक साहित्यकार, समाजसेवी उपस्थित रहे।


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