वासुदेव यादव
बस्ती। श्रीरामजानकी मंदिर प्रांगण में संचालित श्रीराममहायज्ञ में सांयकाल सात बजे से रात्रि 9 बजे तक संत-धर्माचार्यो के श्रीमुख से हो रही सत्संग सुधावृष्टि में सराबोर होकर श्रद्धालु-भक्त अपना जीवन कृतार्थ कर रहे हैं। प्रवचन की सुधावृष्टि करते हुए यज्ञाध्यक्ष बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि सभी धर्मग्रंथों का एक ही उद्देश्य है भूल सुधार करना। संत-धर्माचार्यजन अपने अमृतमयी वचनों से सभी को स्वच्छ निर्मल बनाकर भगवान से मिलाने का कार्य करते हैं। जो क्षमाशील होता है वह भगवान को बहुत प्रिय है। क्षमाशील व्यक्ति की सर्वत्र सराहना होती है।
पूज्यपाद स्वामी श्रीदेवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि शुभ कार्य करने पर यदि निंदा भी हो तो वह श्रेष्ठ है। जो बड़ों का समादर सम्मान करते हैं वे जनश्रेष्ठ होते हैं। स्वामी जी ने कहा जो गुरू आज्ञानुसार धैर्य धारण करते हुए शबरी की भांति भगवान के दर्शन की प्रतीक्षा करते हैं एक ना एक दिन भगवान दर्शन अवश्य देते हैं। इस पुनीत अवसर पर तन तुलसीपीठाधीश्वर ज.गु.स्वामी श्री विष्णु देवाचार्य जी महाराज ने भक्तों को भगवत चरित्र का रसपान कराते हुए कहा कि जहां पुरूषार्थ थक जाता है वहां परमार्थ प्रारंभ होता है। जीवन में जब व्यक्ति थक हार जाता है तो परमार्थ की राह पकड़ लेता है। जो अनंत से दूर हो जाए उसका नाम दुख है, जो अनंत के समीप हो जाए वही सुख है। अनंत भगवान ही हैं। ज.गु. रामानंदाचार्य पूज्यपाद स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज के परमप्रिय यशस्वी कथाव्यास श्रद्धेय धीरेंद्र शास्त्री ने कहा रामचरित्र मानस का पाठ करने का व्यवहारिक लाभ प्राप्त होता है। निरंतर पाठ करने से सभी आपदाएं, विपदाएं समाप्त होती हैं। शास्त्री जी ने कहा संपूर्ण ब्रह्मंड में दुख की कोई दवा नहीं बनी एक मात्र दवा है भगवान का गुणगान।
महंत स्वामी श्रीरामभूषण दास कृपालु जी महाराज ने सद्गुरूदेव की महिमा का बखान करते हुए कहा इस भवसागर रूपी जेल से सद्गुरूदेव भगवान ही मुक्ति दिला सकते हैं। गुरू जीवन के अंधकार मिटा देता है। श्रीहनुमान दास रामायणी ने कहा कि मनुष्य का जीवन विशेषकर भगवान के लिए मिला है। कोई भी यज्ञ बिना संत के पूर्ण नहीं होता। कार्यक्रम संचालक अयोध्या संत समिति अयोध्या के अध्यक्ष महंत कन्हैयादास रामायणी ने अपनी शैली में मिथिला एवं अयोध्या धाम की महिमा का बखान किया। यज्ञ आयोजक सूर्यनारायण दास वैदिक ने सभी समागत संत-महंतों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
इस अवसर पर महंत रामशंकर दास रामायणी, संत पुरूषोत्तम दास, संत केशवाचार्य जी पंजाब, पंडित विष्णु देवनायक शास्त्री, पंडित विष्णु देवाचार्य, रमाकांत शास्त्री, विजय सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। रात्रि 10 बजे से रामइकबाल शरण के निर्देशन में भव्य रामलीला मंचन संचालित है। इस दौरान काफी सुरक्षा दिखी व हजारो की संख्या में भक्तगणों ने कथा का रसपान करके अपने जीवन को धन्य किए।


एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ