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सोंचने पर होंगे मजबूर स्कूल है या ट्रेन


खुर्शीद खान 
सुल्तानपुर, यूपी. इस महंगाई के वक़्त में अपना और फैमली का ख़र्च एफर्ट करना हर किसी के लिए मुश्किल है। वहां राम सुमेर नाम के इस प्रिंसिपल ने पचासों हज़ार रुपए अपनी सैलरी से ख़र्च कर स्कूल को चमका दिया, जिसे देखकर सभी आश्चर्य चकित हैं। 
वीडियो 


वैसे बेसिक ग्वार्मेन्ट स्कूल का नाम सुनते ही यह विचार आना शुरू हो जाता है कि,  जर्जर बिल्डिंग होगी, टीचर इधर-उधर घूमते होंगे तो बच्चों का क्या होगा? लेकिन सिटी से 20 किलोमीटर दूर ब्लॉक 
भदैया के नारायणपुर के स्कूल की तस्वीर देखने के बाद सबके दिमाग से ग्वार्मेन्ट स्कूल के प्रति बसी ग़लत धारणा निकल जाएगी। 
इस जूनियर स्कूल में डिजिटल क्लास,  कंप्यूटर रूम, साइंस लैब, और देश की राजनीत का हर अपडेट बच्चो को दिया जाता है। 
यही नहीं बच्चियों के लिए अलग से सिलाई-कढ़ाई और मेहदी की क्लासेज़ भी चलाई जाती है। 
बच्चो को टेबल टेनिस के साथ, वालीवाल और बैडमिंटन का कोट भी मुहैया कराया गया है। 
क़ाबिले गौर बात ये कि, इन सब फैसिलिटीज़ में न तो ग्वार्मेन्ट से कोई मदद, न कोई चंदा बल्कि स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर ने अपनी सैलरी से ये सब कुछ इंतेज़ाम किया है। 

स्कूल का नाम रख दिया है जूनियर हाई नारायणपुर एक्सप्रेस

ट्रेन के इंजन और उसके डिब्बों के मॉडल में दिखने वाला यह जूनियर हाई स्कूल नारायणपुर अपनी कार्यशैली को लेकर पूरे डिस्ट्रिक्ट में ही नहीं मंडल में जाना जाता है। 
इसका भवन और साज-सज्जा और सुविधा किसी प्राइवेट स्कूल से काम नहीं है,स्मार्ट क्लास हो या फिर कम्प्यूटर क्लास हो सभी इस स्कूल में मौजूद है आश्चर्य इस बात का है सरकारी फण्ड न मिल पाने की वजह से यहाँ के टीचर अपने वेतन से सहयोग करके इस स्कूल को आधुनिक और प्राइवेट के बराबर नहीं प्रस्तुत कर पा रहे है परन्तु वह अच्छा बनाने के प्रयास में है।
इसलिए इसका नाम भी जूनियर हाई स्कूल नारायणपुर एक्सप्रेस रख दिया गया है। 

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