सुनील उपाध्याय
बस्ती । प्रेम चन्द साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान की ओर से रविवार को पिछले पांच दशक से निरन्तर साहित्य साधना को समर्पित दुमदार दोहों के जनक डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग के सम्मान में राष्ट्रीय एकता को समर्पित कवि सम्मेलन मुशायरे का आयोजन किया गया। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्रीमती रूपम मिश्रा की उपस्थिति में डा. जगमग को अंग वस्त्र, प्रमाण-पत्र देकर साहित्य वृहस्पति सम्मान से सम्मानित किया गया। डा. जगमग की रचना ‘‘ मेरे मन का राम भाग्यशाली है कितना, जिसकी सीता कंचन मृग पर नहीं मचलती’ को श्रोताओं ने सराहा।
भाजपा के वरिष्ठ नेता पुष्कर मिश्र ने कहा कि डा. जगमग ने साहित्य के क्षेत्र में जो अलख जगाया है उसकी गूंज देश दुनियां के अनेक हिस्सों में हैं। मारीशस से लेकर नेपाल की साहित्यिक यात्रा कर चुके डा. जगमग के दुमदार दोहे लोगों की जुबान पर है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि डा. जगमग ने टेलीविजन, रेडियों आदि के माध्यम से अपनी पुख्ता जमीन तैयार किया। खासबात यह कि वे युवा रचनाकारों को जिस प्रकार से अवसर और साहस देते हैं ऐसे बहुत कम देखने सुनने को मिलता है।
अध्यक्षता करते हुये सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि डा. जगमग को पीढियां तैयार करने का श्रेय हैं। वे व्यग्ंय विधा के साथ ही आध्यात्मिक, गंभीर रचना के क्षेत्र में सक्रिय हैं जो शुभ संकेत हैं। त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने कहा कि पूर्वान्चल में डा. जगमग की ख्याति के पीछे उनका सहज व्यक्तित्व और रचनाओं का विराट संसार है।
कार्यक्रम में श्याम प्रकाश शर्मा, मो. वसीम अंसारी, राम कृपाल पाण्डेय, डा. ओम प्रकाश पाण्डेय, भानु प्रताप सिंह आदि ने डा. जगमग के व्यक्तित्व, कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। विनोद उपाध्याय के संचालन में आयोजित कवि सम्मेलन डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी ‘दीपक’ सागर गोरखपुरी, ताजीर वस्तवी, जगदम्बा प्रसाद भावुक, लालमणि प्रसाद, अजमत अली सिद्दीकी, आतिश सुल्तानपुरी, डा. अफजल हुसेन अफजल, कलीम बस्तवी, डा. वी.के. वर्मा, सुधीर सिंह साहिल, अजीत श्रीवास्तव राज, पं. चन्द्रबली मिश्र, पंकज सोनी, रामचन्द्र राजा, नवनीत पाण्डेय, निखिल आदि की रचनायें सराही गई। जय प्रकाश गोस्वामी, डी.डी. तिवारी, प्रेमशंकर लाल श्रीवास्तव, अभयदेव शुक्ल, बागीश सिंह, सतीश सोनकर, दीपक प्रसाद, पप्पू भैया, जय प्रकाश स्वतंत्र, रणजीत प्रताप सिंह, डा. नवीन सिंह, विशाल पाण्डेय, डा. राममूर्ति चौधरी, सन्तोष भट्ट, त्रिभुवन प्रसाद श्रीवास्तव, वाहिद अली सिद्दीकी, हरि स्वरूप दूबे, महेन्द्र शंकर के साथ ही अनेक साहित्यकार, कवि, समाजसेवी उपस्थित रहे।


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