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जब राजीव गांधी बोले लो मैं छोटा हो जाता हूं, गुज़रे पल की देखें झलक


अमेठी, यूपी. सोमवार 21 मई को आज पूर्व युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 27 वीं पुण्यतिथि है। राजीव गांधी के जीवन की मुख्य बातों में एक है उनका स्वभाव, हर छोटे-बड़े व्यक्ति को वो एक समान देखते थे। यही वजह है के उनके साथ काम कर चुके कार्यकर्ता आज भी उनके सादगी के किस्से सुनाते नहीं थकते। हम अपने पाठक को ऐसा ही किस्से बता रहे है। 
वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि जगदीश पीयूष बताते हैं कि मई 1984 की ये बात है, राजीव जी अमेठी दौरे पर थे, इस दौरान वो  अमेठी के ग्राम 'सड़ता' में लोगों से मुलाक़ात को पहुंचे थे। 
इसी गांव में काव्य श्री नाम की एक बिटिया अपने ननिहाल गर्मियों की छुट्टी पर आई थी, वो राजीव जी की एक झलक पाने और उनसे मिलने के लिए अपने नाना के संग पहुंची थी। 
उसके हाथ में गुल्हड़ और कनेर के फूलों की हाथों से गून्धी हुई माला ले रखी थी। 
राजीव भाषण खत्म किया, बच्ची को पास बुलाया और पूछा ये माला किसके लिए लाई हो? काव्य श्री ने जवाब दिया आपके लिए, तब वो बोले हमें पहनाओगी नही? बच्ची ने जवाब दिया आप तो बहुत लम्बे हैं और मैं बहुत छोटी मेरा हाथ आप तक नहीं पहुंच रहा। इस पर राजीव जी बोले लो मैं छोटा हो जाता हूं, बिल्कुल तुम्हारे बराबर अब मुझे माला पहनाओ। और फिर हंसते हुए सिर को झुका दिया। 


















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