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ग्रामीण डाक सेवकों का आंदोलन लाया रंग




अखिलेश्वर तिवारी
भारत सरकार ने डाक सेवकों की मांग को माना

बलरामपुर ।। देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित डाकघरों में तैनात लगभग दो लाख 60 हजार ग्रामीण डाक सेवकों की मांग को भारत सरकार ने मान लिया है । सरकार द्वारा मांगों को माने जाने के बाद ग्रामीण डाक सेवक संघ ने काफी खुशी का इजहार करते हुए सरकार के फैसले का स्वागत किया है और अपनी मांगों को लेकर गत 14 मई से जीडीएस कर्मी हड़ताल पर थे जो आज समाप्त कर दिया गया है ।

                इस आशय की जानकारी देते हुए ग्रामीण डाक सेवक संघ के मंडलीय महामंत्री पंडित रामानंद तिवारी ने बताया की ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात डाक कर्मियों को बहुत ही कम मानदेय दिया जा रहा था साथ ही कोई सुविधाएं व कार्य के घंटों का निर्धारण नहीं था । इन्हीं सब समस्याओं को लेकर विगत कई वर्षों से डाक सेवक संघ संघर्ष कर रहा था । भारतीय मजदूर संघ के सहयोग से काफी दिनों के संघर्ष के बाद भारत सरकार ने कमलेश चंद्रा की अध्यक्षता में आयोग गठित की थी जिसने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दिया था परंतु सरकार ने कमलेश चंद्रा की रिपोर्ट लागू नहीं किया था । आयोग की रिपोर्ट को लागू कराने के लिए संघ ने लंबा संघर्ष किया है । गत 14 मई से पूरे देश के ढाई लाख से अधिक ग्रामीण डाक सेवक पूर्ण रूप से कार्य बहिष्कार करके हड़ताल पर चले गए थे जिसका नतीजा भी काफी अच्छा निकला और भारत सरकार ने आज हमारी मांगों को मानते हुए वेज रिवाइज करने का फैसला किया है । सरकार के फैसले का संघ व कर्मचारी स्वागत करते हैं और इसी के साथ ही तेइस दिनों से चला आ रहा कार्य बहिष्कार भी समाप्त कर दिया गया है । अब सभी डाककर्मी पूर्ववत अपने काम पर वापस लौट गए हैं । उन्होंने इस संघर्ष में साथ देने के लिए समस्त डाक कर्मियों पदाधिकारियों बीएमएस के नेताओं तथा संघ के केंद्रीय नेतृत्व के नेताओं का आभार व्यक्त किया है ।

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