अमरजीत सिंह
फ़ैजाबाद : प्रत्येक वर्ष किसानों के खेतों के लिये काल का ग्रास बनी रही बनतला ताल से पानी के उफान पर ग्राम पंचायत की ओर से लगाम लगाने की कवायद शुरू की जा रही है।गोयडा झील से सटे इस बनतला ताल से बरसात के समय हर वर्ष पानी का उफान होता है।जिसमें पाली गई ग्रास मछलियां उफान पानी के सहारे किसान के खेतों में पहुंच जाती थी।जिससे किसान की धान की फसल चौपट हो जाती थी।किसानों की इस समस्या को विगत वर्ष भी राष्ट्रीय सहारा ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।इस बार बरसात से पूर्व ही ग्राम प्रधान पचलो द्वारा मनरेगा योजना से इस ताल का सौन्दरीकरण शुरू करा दिया गया है।प्रधान पति सैय्यद तामीर मियां ने बताया कि मौसम ने साथ दिया तो पंद्रह दिन के अंदर सौन्दरीकरण का कार्य पूरा हो जाएगा।
बताते चले कि मवई ब्लॉक क्षेत्र के पचलो गांव के सामने लगभग अस्सी बीघे में फैली गोयडा झील के बगल बनतला ताल है।गहराई कम होने के कारण ये प्रतिवर्ष थोड़ी ही बारिश भर जाती है।और दो तीन बारिश में ही इसका पानी उफान ले लेता है और लोगों के खेतों भर जाता है।जिसके चले ताल में पली रोहू ग्रास मछलियां किसानों के खेतों में पहुंच धान के पौधों को कुतर डालती थी।जिससे दर्जनों किसानों के सैकड़ों एकड़ खेत मे लगी धान की फसल से न खाने के लिये अनाज मिलता था न जानवरों के लिये पुआल।हालांकि विगत वर्ष नाले की सफाई भी कराई गई लेकिन झील व ताल का पानी किसान के खेतों में भरा रहता था।ग्राम प्रधान पति सैय्यद तामीर मियां ने बताया कि गाटा संख्या 169 पर स्थित बनतला ताल में 70× 55 मीटर का सौन्दरीकरण छ लाख 55 हजार की लागत से मनरेगा योजना अन्तर्गत शुरू करा दिया गया है।इन्होंने बताया जब तालाब की थोड़ी गहराई व ऊपर चारों ओर पटरियों की मेड़बंदी हो जाएगी।तो बरसात में भी इसका पानी उफान नही लेगा।और ताल व झील में पानी का संचयन भी हमेसा रहेगा।पचलो गांव के किसान मोल्हे कल्लू अंसारी हाफिज सलीम माशूक अली मुन्ना खाँ बिल्लू आदि लोगों ने तालाब के सौन्दरीकरण पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

एक टिप्पणी भेजें
0 टिप्पणियाँ