सुनील उपाध्याय
बस्ती। वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति द्वारा सोमवार को महान क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद और आजादी की लडाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बाल गंगाधर तिलक को उनकी जयंती पर कलेक्टेªट परिसर में याद किया गया।
मुख्य वक्ता हिन्दी के पूर्व विभागाध्यक्ष डा. रामदल पाण्डेय ने कहा कि देश की आजादी तभी सुरक्षित रहेगी जब हम अमर बलिदानियों, आजादी के लिये योगदान करने वालों को स्मरण रखें। आजादी की संघर्ष यात्रा के विविध पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुये डा. पाण्डेय ने कहा कि क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद गद्दारी के कारण मारे गये। आज भी समाज में ऐसे तत्व सक्रिय है। हमें सतर्क रहना होगा।
कार्यक्रम को श्याम प्रकाश शर्मा एडवोकेट, सत्येन्द्रनाथ मतवाला, विनय कुमार श्रीवास्तव, डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ आदि ने सम्बोधित करते हुये चन्द्रशेखर आजाद और बाल गंगाधर तिलक के योगदान पर प्रकाश डाला। राजदेव वर्मा, मो. वसीम अंसारी, जगदीश प्रसाद, राम मूरत चौधरी, आतिश सुल्तानपुरी, पं. चन्द्रबली मिश्र, पेशकार मिश्र आदि उपस्थित रहे।
जयन्ती पर याद किये गये क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद
देश को आजाद कराने के लिये सर्वस्व न्यौछावर कर देने वाले महान क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद को उनके 112 वें जयन्ती पर सोमवार को प्रेस क्लब में याद किया गया। चित्रांश क्लब के मण्डल अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने चन्द्रशेखर के अदम्य साहस, योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद एक महान भारतीय क्रन्तिकारी थे। उनकी उग्र देशभक्ति और साहस ने उनकी पीढ़ी के लोगों को स्वतंत्रता संग्राम में भागलेने के लिए प्रेरित किया। चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह के सलाहकार, और एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और भगत सिंह के साथ उन्हें भारत के सबसे महान क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है।
जयन्ती पर आयोजित कार्यक्रम को सत्येन्द्रनाथ मतवाला, अशोक श्रीवास्तव, पं. सुनील भट्ट, राजेश चित्रगुप्त, अनिल कुमार पाण्डेय, परमेश्वर शुक्ल पप्पू आदि ने सम्बोधित कर चन्द्रशेखर आजाद को नमन् किया। कहा कि असहयोग आंदोलन के स्थगित होने के बाद चंद्रशेखर आजाद और अधिक आक्रामक और क्रांतिकारी आदर्शों की ओर आकर्षित हुए। उन्होंने किसी भी कीमत पर देश को आजादी दिलाने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया। चंद्रशेखर आजाद ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसे ब्रिटिश अधिकारियों को निशाना बनाया जो सामान्य लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों के विरुद्ध दमनकारी नीतियों के लिए जाने जाते थे। चंद्रशेखर आजाद काकोरी ट्रेन डकैती (1926), वाइसराय की ट्रेन को उड़ाने के प्रयास (1926), और लाहौर में लाला लाजपतराय की मौत का बदला लेने के लिए सॉन्डर्स को गोली मारने (1928) जैसी घटनाओं में शामिल थे। आज वे हमारे बीच नही हैं किन्तु उनका आदर्श, राष्ट्रप्रेम सदैव प्रेरणा देता रहेगा। कार्यक्रम का संचालन करते हुये पं. सरोज मिश्र ने चन्द्रशेखर आजाद के अनेक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पंकज गोस्वामी ने देश भक्ति गीतों के माध्यम से चन्द्रशेखर आजाद को नमन् किया। क्लब उपाध्यक्ष सत्येन्द्र श्रीवास्तव, मनमोहन श्रीवास्तव काजू, अमृतपाल सिंह ‘सनम’ सभासद सचिन शुक्ल, रमेश गुप्ता, महेन्द्र तिवारी, दिनेश पाण्डेय, विशाल शुक्ल, सिमरन मानसिंह, राकेश त्रिपाठी, शरद सिंह रावत, मुकेश श्रीवास्तव, राघवेन्द्र त्रिपाठी, मो. कमाल, फिरोज अहमद, राम विलास शर्मा, धनुषधारी गुप्ता, अनिल कुमार मिश्र, लवकुश यादव, सूरज गुप्ता आदि उपस्थित रहे।



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