Type Here to Get Search Results !

Action Movies

Bottom Ad

दशरथ महल मन्दिर में धूमधाम से मनाया गुरु पूर्णिमा का उत्सव


वासुदेव यादव
अयोध्या। चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ का राजमहल दशरथ बड़ी जगह शुक्रवार काे गुरू-शिष्य परम्परा का वाहक बना। माैका था गुरू पूर्णिमा पर्व का। मन्दिर में सुबह से ही शिष्यों का जमावड़ा लगा रहा। देश-विदेश से आए शिष्यगण अपने गुरू विन्दुगाद्याचार्य महन्त स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज का पूजन-अर्चन, वन्दन किये। तत्पश्चात उनकी आरती उतारकर अंगवस्त्र, फल-मिष्ठान व गुरू दक्षिणा भेंट की। 
  इससे पहले महल के विन्दुगाद्याचार्य महन्त देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज ने अपने गुरूदेव साकेतवासी महन्त रामप्रसादाचार्य महाराज की मन्दिर में स्थापित मूर्ति का पूजन-अर्चन किया। इस माैके पर महन्त देवेन्द्र ने कहा कि  गुरू के बिना व्यक्ति भव सागर काे पार नही कर पाता। इसलिए भव सागर काे पार करने के लिए गुरू का सहारा व आश्रय लेना पड़ता है। गाेस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि- गुरू बिनु भवनिधि तरैं न काेई। जाे विरंचि शंकर सम हाेई।। अर्थात् ब्रहमा और शंकर के समान हाेने के बाद भी अगर वह जीव गुरू मंत्र या गुरू दीक्षा नही लिया है। ताे वह भवसागर से पार नही हाे सकता। महन्त ने कहा कि शास्त्रों में भी बताया गया है कि गुरु में सारे तीर्थाें का निवास माना जाता है। गुरू पूर्णिमा के दिन गुरू पूजन की परम्परा अनादिकाल से चली आ रही है। इस पूजन से सारे देवता, सारे तीर्थ यह सब लाेग प्रसन्न हाेते हैं। इस दौरान हजारो भक्तो ने दर्शन पूजन कर गुरुजी का आशीर्वाद व गुरु मंत्र लिए। आये भक्तो को स्वामी राम भूषणदास जी महाराज उर्फ कृपालु जी ने सबका स्वागत सत्कार किये। 
  इस दौरान सूर्य नारायण दास वैदिक, पण्डित विष्णु प्रसाद नायक,राम शंकरदास रामायणी, रामजी दास,नमो नारायण मिश्र, गुरुचरण यादव प्रधानजी आदि अन्य मौजूद रहे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Below Post Ad

Comedy Movies

5/vgrid/खबरे