सुनील उपाध्याय
बस्ती । सवर्ण लिबरेशन फ्रण्ट संयोजक दीन दयाल त्रिपाठी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) एस.सी.एस.टी. कानून के मूल प्राविधानों को बहाल करने सम्बन्धी विधेयक के प्रस्ताव को मंजूरी दिये जाने की कड़े शव्दों में निन्दा करते हुये कहा है कि केेन्द्र की मोदी सरकार वोट की लालच में समाज में वैमनस्य को बढावा देना चाहती है।
प्रेस को जारी विज्ञप्ति के माध्यम से दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने लम्बे विचार मंथन के बाद एस.सी.एस.टी.एक्ट के मामलों में जांच के बाद कार्रवाई का आदेश दिया था, न्यायालय की मंशा स्पष्ट थी कि जातिगत आधार पर किसी का अकारण उत्पीड़न न होने पाये और वास्तविक दोषी ही दण्डित हों किन्तु अब बिना जांच पड़ताल के एस.सी.एस.टी.एक्ट के मामलों में गिरफ्तारियां होने लगेंगी। इससे समाज में विद्वेष बढेगा और निर्दोष प्रताड़ित होंगे। मांग किया कि केन्द्र सरकार संसाधन विधेयक वापस ले अन्यथा एस.एल.एफ. न्याय की मांग को लेकर निर्णायक आन्दोलन को बाध्य होगा। बताया कि 7 अगस्त को पदोन्नति में जातिगत आरक्षण और एस.सी.एस.टी.एक्ट समाप्त किये जाने, एस.सी.एस.टी.एक्ट में फर्जी फंसाये गये लोगों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर विशाल प्रदर्शन कर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जायेगा।

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