गोण्डा। भाजपा सरकार में कुर्मी समाज का सबसे कम प्रतिनिधित्व है। इस वर्ग से कोई भी मुख्यमंत्री या राज्यपाल नही बनाया गया। यह बात सिंचाई विभाग के डाक बंगले में उत्तर प्रदेश सरदार पटेल बौद्धिक विचार मंच के महामंत्री जगदीश शरण गंगवार ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 12 प्रतिशत जनसंख्या इस समाज की है। फिर भी इनकी बराबर उपेक्षा हो रही है। इस बात की पोल तब खुल जाती है कि बसपा शासन काल में इस बिरादरी से 9 तथा सपा में 7 और वर्तमान भाजपा की सरकार में महज दो मंत्री बनाये गये है। यह उपेक्षा नही तो और क्या है।
सरकार में भाजपा की तीस विधायक होते हुए भी केवल दो को ही मंत्री बनाया गया। जबकि संख्या बल के आधार पर पांच मंत्री होने चाहिए। यही नहीं अन्य समाजों की जनसंख्या इस बिरदारी से कम होते हुए भी उनके कई मुख्यमंत्री व राज्यपाल रह चुके है।
सूबे में करीब पचीस विश्वविद्यालय है। फिर भी इस समाज का कोई कुलपति इस समय नही है। प्रदेश में चार आयोग है क्रमशः लोक सेवा आयोग, उच्चतर शिक्षा चयन आयोग, माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग व अधिनस्थ सेवा चयन आयोग में आज तक कोई अध्यक्ष नही बना। यही नहीं लोक सेवा आयोग में 2001 के बाद से कोई सदस्य भी नही बनाया गया।
उन्होंने कहा अगर संख्या बल के अनुपात में यदि इस समाज को सत्ता या राज्य के विभिन्न आयोगों, निगमों में समुचित भागीदारी नही मिली तो आगामी लोकसभा चुनाव में समाज को अन्य सियासी विकल्प तलाश करने के लिए जागरुक किया जायेगा। कार्यक्रम को डा0 क्षेत्रपाल गंगवार अध्यक्ष बौद्धिक विचार मंच ने भी सम्बोधित किया।उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर मंच बिरादरी की उपेक्षा बर्दाश्त नही करेगा।
यदि समय के रहते इस पर सत्ताधारी पार्टी द्वारा गम्भीरता से विचार न किया गया तो निश्चित रूप से इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इस अवसर पर राम करन वर्मा, जगदेव प्रसाद, राम उजागर, संतोष, शिव प्रसाद, एस.आर. वर्मा, पूर्व डीन नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय सतीश वर्मा, राम चैधरी, शिव नरायन, बुधई वर्मा, कनिक राम वर्मा सहित भारी संख्या में
मौजूद रहे।


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