अमरजीत सिंह
फैजाबाद। रामनगरी अयोध्या में दीपावली के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया का पर्व बड़े ही धूम धाम से मनाया गया है इसे यम द्वितीया भी कहते हैं. आज के दिन ही चित्रगुप्त भगवान की पूजा होती है. ग्रंथो में लिखा हैं कि जब भगवान श्री राम 14 वर्ष वनवास के बाद रावण वध कर माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे ने के बाद भगवान श्री राम का राज्याभिषेक करने के तैयारी शुरू कर दिया था वहीँ राजा भरत ने गुरु वशिष्ठ से सभी देवी देवताओं को निमंत्रण सन्देश भेजने की व्यवस्था कराया,
वहीँ गुरु वशिष्ठ ने यह काम अपने शिष्यों को सौंप दीं और जब सभी देवीदेवता राज्याभिषेक के लिए पहुँच गए आ गए तब भगवान श्री राम ने अपने भाई भरत से पूछा इस दौरान चित्रगुप्त नहीं दिखाई दे रहे है काफी खोज बीन में पता चला की गुरु वशिष्ठ के शिष्यों ने भगवान चित्रगुप्त को निमत्रण नहीं पहुंचाया था जिसके कारण भगवान चित्रगुप्त नहीं आये. वहीँ चित्रगुप्त ने गुरु वशिष्ठ की इस भूल को अक्षम्य मानते हुए यमलोक में सभी प्राणियों का लेखा जोखा लिखने वाली कलम को उठा कर किनारे रख दिया जिससे यमलोक के सारे काम रुक गये प्राणियों का लेखा जोखा ना लिखे जाने के चलते ये तय कर पाना मुश्किल हो रहा था की किसको कहाँ भेजे.
तब गुरु वशिष्ठ की इस गलती को समझते हुए भगवान राम ने भगवान चित्रगुप्त को अयोध्या आने का निमंत्रण भेजा और इसी के साथ भगवान चित्रगुप्त को अयोध्या में विराजमान रखने के लिए भगवान चित्रगुप्त के मंदिर की स्थापना की जिसके साथ आज के दिन की पूजा शुरू हुई अज भी यह मंदिर अयोध्या के मीरापुर डेरा बीबी स्थित प्राचीन चित्रगुप्त मंदिर है जहां पर आज के दिन कायस्थ समाज के लोगों द्वारा विधि विधान से कलम पूजा करते हैं.
यम द्वितीया पर भईया दूज का पर्व का भी विशेष महत्व
इसके साथ आज दिन भईया दूज का पर्व भी मनाया जाता हैं पर्व भाई बहन के लिए प्रमुख पर्व होता हैं इसमें बहन अपने भाई की लंबी उम्र की कामना के लिए सुबह से निराजल व्रत रखती हैं जो कि पूजा मुहूर्त के समय विधिविधान पूजा करने साथ व्रत पूर्ण करती हैं यह पर्व भी पौराणिक कथाओं में लिखा हैं
कि यमराज अपनी बहन यमुना से बहुत प्यार करते थे लेकिन कारण वस वह अपनी बहन से नहीं मिल पाते थे और आज के दिन यमराज की बहन यमुना ने अपने तपस्या के बल पर अपने भाई को मिलने के लिए विवश कर देती हैं तभी यमराज अपनी बहन से मिलने पहुंचते हैं जिससे बहन अपने भाई को देख कर बहुत प्रसन्न हो जाती हैं और अपने भाई के आने पर घर में तरह तरह के पकवान बनाती हैं .
लेकिन वही जब यमराज जाने लगते हैं तो यमराज अपनी बहन जमुना से अपनी इच्छा से वरदान मांगने को कहते हैं तभी यमुना कहती है कि यदि आप हमें वरदान देना चाहते हैं तो यही वरदान दीजिए कि आज से हर वर्ष इस आज की तारीख शुक्ल पक्ष द्वितीया को आप हमारे घर आएंगे उसी दिन से यह भैया दूज का पर्व मनाया जाता है


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