रमेश कुमार मिश्र
गोण्डा।तरबगंज थानाक्षेत्र में व्यापक पैमाने पर हो रही अबैध कच्ची शराब व मेडिकल स्टोर पर नशे गोली की बिक्री का सीधा असर क्षेत्र के नवयुवको पर होरहा है।जो किसी ना किसी बहाने नशे का शिकार होकर अपनी जिन्दगी बरबाद कर रहे है।जिससे परिवार के लोग परेशान है।लेकिन इन जहरीली दवाओं और अबैध कच्ची शराब पर अंकुश लगाना तो दूर दिन प्रतिदिन और दुकाने बढ़ती जारही है।
बढ़े भी क्यो ना सबसे ज्यादा कमाई का धन्धा जो बना हुआ है।जिसमे स्थानीए पुलिस बराबर की हिस्सेदार होती है।किसी की जिन्दगी से कोई लेना देना नही।पुलिस को पैसे से मतलब है।धन्धा करो रूपया दो वो भी खुलेआम डंके की चोट पर कोई तुम्हारा बाल बाँका नही कर सकता पुलिस प्रशासन तुम्हारे साथ है।
हाँ साहब ये कहानी नही है ये है हकीकत तरबगंज थानाक्षेत्र की जहाँ सारे अबैध कार्य खुलेआम हो रहे पुलिस की सह पर कही से कोई रोक नही है।यही नही क्षेत्र में बिकरही अबैध कच्ची शराब व नशे की गोली का शिकार अधिकतर युवा लोग होरहे है।जो कच्ची उम्र में ही नशे को गले लगाकर अपनी और अपने परिवार की जिन्दगी बरबाद कर रहे है।जिससे परेशान एक पिता ने अपने बच्चे को नशे से बचाने व अबैध कच्ची शराब नशे की गोली पर अंकुश लगाने की गोहार भारत सरकार से की है।
बताते चले तरबगंज थानाक्षेत्र में खुले आम बिक रही अबैध कच्ची शराब व नशे की गोली से त्रस्त तरबगंज थानाक्षेत्र के ग्राम धौरहराघाट के मजरा झामपुरवा जिला गोण्डा निवासी उमाप्रसाद पुत्र प्रेमनाथ ने जिलाप्रशासन व प्रधानमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर नशे की गोली व अबैध कच्ची शराब की बिक्री पर अविलम्ब अंकुश लगाने की माँग की है।जबकि अबैध कच्ची शराब की दुकान है।
सेझिया, रेता दलसिंह, महँगीपुरवा, हरदिहन पुरवा, रानीपुर, दुर्जनपुर भोपतपुर,रामपुर टेगरहा,नरायनपुरघाट,पकड़ी,राँगी, घाँचा,कटहा सहित लगभग पाँच दर्जन स्थानों पर अवैध कच्ची शराब की बिक्री खुलेआम अड्डा खोलकर की जारही है। जिससे क्षेत्र की युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में होतीे जा रही हैं।
जिसकी शिकायत ग्राम सभा धौरहरा घाट के उमा प्रसाद ने अपने 28 वर्षीय बेटे गिरजेश कुमार को नशे की गोली खाने और कच्ची शराब पीने से कई बार गंभीर बेहोशी की हालत में पुलिस और एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया। तरबगंज और दुर्जनपुर बाजार मेडिकल स्टोरों पर नशे की गोली और क्षेत्र में कच्ची शराब की बिक्री से पुनः नशे की गिरफ्त में आ गया है। जिसको पीड़ित ने बंद कराने की मांग जिला प्रशासन और लोक शिकायत भारत सरकार से की है।


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