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भाजपा कार्यकर्ताओ ने जिलाधिकारी को सौपा महामहिम को संबोधित ज्ञापन











सुनील उपाध्याय 
बस्ती । भाजपा केंद्र नेतृत्व के आवाहन पर आज जिलाध्यक्ष पवन कसौधन के नेतृत्व में महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी बस्ती को दिया गया। भाजपा कार्यालय पर एकत्र होकर सभी भाजपाई जिलाधिकारी कार्यालय पहुचे, जहाँ लोगो ने ज्ञापन सौपा। 







जिसमे राष्ट्रपति से मांग किया गया की मान्यवर, आपके संज्ञान में हम यह विषय लाना चाहते हैं कि राफेल खरीद समझौते के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य राहुल गांधी ने तथ्यहीन, बेबुनियाद, निराधार एवं अतार्किक प्रश्न खड़ा करके उसे दुष्प्रचारित कर देश की जनता को गुमराह करने का कार्य किया है। इस मामले पर माननीय सर्वोच्च न्यायलय में चार याचिकाएं दाखिल की गयीं। इन याचिकाओं में, निर्णय प्रक्रिया, कीमत तथा ऑफसेट पार्टनर को लेकर, तीन विषय प्रमुखता से उठाये गये थे।







गत 14 दिसंबर 2018 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप पाया है। इस निर्णय ने यह संदेश भी दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों को सिर्फ संदेह और  भ्रामक समाचारों के आधार पर न्यायायल के मंच का उपयोग नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इस समझौते पर किसी भी प्रकार का कोई संदेह करने का कोई ठोस आधार नहीं नजर आता है। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर यह भी पाया कि वायुसेना को ऐसे विमानों की जरूरत है और इस जरूरत की पूर्ति के लिए हुई इस खरीद प्रक्रिया में तय मानकों का पालन किया गया है। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा,‘इस प्रक्रिया को लेकर हम संतुष्ट हैं और संदेह की कोई वजह नहीं नजर आती है। हमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला है, जिससे पता चले कि कोई व्यापारिक स्तर पर पक्षपात हुआ है। ‘ न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि “समझौते पर लोगों की निजी धारणा क्या है, यह ज्यादा मायने नहीं रखता है।






“ वर्ष 2001 में लड़ाकू विमान खरीदने का विषय आया था। कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के इस कार्यकाल में देश की सुरक्षा से जुड़े इस मामले को अधर में लटकाए रखा। केंद्र में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इस दिशा में सकारात्मक पहल हुई तथा पारदर्शी तरीके से इस प्रक्रिया को पूरा किया गया। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सेना की महत्वपूर्ण जरूरत को हीला-हवाली करके लटकाने वाली कांग्रेस और इसके अध्यक्ष  आज इस पर बेबुनियाद दुष्प्रचार कर रहे हैं। अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद यह साबित हो चुका है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी द्वारा इस मामले को सिर्फ और सिर्फ अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए उठाया गया है।





 यह एक गंभीरतापूर्ण और चिंता का विषय है कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि द्वारा देश की सुरक्षा को ताक पर रखकर ऐसे विषय पर दुष्प्रचार करना गलत है, जिससे देश की छवि वैश्विक पटल पर धूमिल हो सकती है।  राहुल गाँधी का इस पूरे मामले में आचारण अत्यंत ही असंवेदनशील एवं देशहित के खिलाफ रहा है। चूंकि न्यायालय के निर्णय के बाद राफेल के मुद्दे पर श्री राहुल गांधी द्वारा बोला गया हर झूठ उजागर हुआ है तथा सच्चाई देश की जनता के सामने आई है।






हम यह मांग करते है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने तथा भारत की अन्तर्राष्ट्रीय साख से समझौता कर जनता से बोले गये इस गंभीर झूठ के लिए उन्हें लोकसेवक के पद से मुक्त किया जाए।






इस मौके पर वरिष्ट नेता राजेंद्र गौड़, पूर्व जिलाध्यक्ष दयाशंकर मिश्रा, राकेश श्रीवास्तव, राम चरन चौधरी, सुरेन्द्र सिंह, सुखराम गौड़, मीडिया प्रभारी अमृत वर्मा, राजन मिश्रा, कुन्दन लाल वर्मा, कीर्ति वर्धन सिंह, बलराम गौड़, ओम प्रकाश ठाकुर, सतेन्द्र सिंह भोलू, अमर सोनी,  निर्मला श्रीवास्तव, जगदम्बा शुक्ला, अजय श्रीवास्तव, बलिराम, मनमोहन श्रीवास्तव काजू, शीला पाठक, मनीष चौबे, दलजीत गुप्ता, संध्या दीक्षित, शालिनी मिश्रा, शशि मिश्रा, अंजलि मिश्रा, अनिल कुमार पाण्डेय, दिवाकर सोनी, शशि भूषण पाण्डेय, सूरज गुप्ता, कमलाकांत शुक्ला सहित सैकड़ो कार्यकर्ता सम्लित हुए।

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