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विद्यालय से गायब रहना गुरु जी को पड़ा महंगा :तीन अध्यापक निलंबित









अखिलेश्वर तिवारी 
बलरामपुर ।। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए जारी किए गए सख्त फरमान के बाद शिक्षा विभाग द्वारा लगातार जांच अभियान चलाकर कार्यवाही की जा रही है । तमाम जांच के बावजूद भी परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों की गतिविधि में सुधार नहीं आ रहा है जिसका नतीजा आए दिन विद्यालयों का बंद रहना अथवा विद्यालय से अध्यापकों के गायब रहने के रूप में दिखाई देता है । 






ताजा मामला विकास खंड सदर के प्राथमिक विद्यालय पानन कुइया का है जहां पर औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय में ताला लगा पाया गया । इस विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक के साथ एक सहायक अध्यापिका की तैनाती की गई है । निरीक्षण करता प्रातः 9:30 बजे विद्यालय में पहुंचे तब तक विद्यालय में ताला लगा था ।गांव से रसोइयों को बुलवाकर ताला खुलवाया गया और वहां मौजूद चंद बच्चों को बुलाकर प्रार्थना करा कर पठन-पाठन कार्य शुरू कराया गया । 11 बजे तक कोई भी अध्यापिका विद्यालय तक नहीं पहुंची जिसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय की प्रधानाध्यापिका पल्लवी पांडे तथा सहायक अध्यापिका आशा मिश्रा को निलंबित करते हुए उन्हें उसी विद्यालय से संबंध कर दिया है । 





इस पूरे मामले की जांच खंड शिक्षा अधिकारी तुलसीपुर को सौंपी गई है । यह भी निर्देश दिया गया है कि यदि यह दोनों अध्यापिका निलंबन के दौरान प्राथमिक विद्यालय पानन कुइन्याँ में नियमित रूप से उपस्थिति दर्ज नहीं कराती हैं तो उनका सेवा समाप्त कर दिया जाएगा । इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय सिरसिया के निरीक्षण के दौरान वहां के प्रधानाध्यापक आलोक कुमार पाठक अनुपस्थित पाए गए । पता करने पर ज्ञात हुआ कि वह काफी दिनों से ऐसा कर रहे हैं । उनके अनुपस्थित रहने से मिड डे मील के संचालन व अन्य शासकीय कार्यों में असुविधा हो रही है ।







 मामले की गंभीरता को देखते हुए बीएसए हरिहर प्रसाद ने प्रधाना अध्यापक आलोक कुमार पाठक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उन्हें पचपेड़वा शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बिशुनपुर टनटनवा से संबंध कर दिया है और निर्देश दिया है कि निलंबन के दौरान नियमित रूप से उपस्थिति बिशुनपुर टनटनवा में दर्ज कराएं, यदि अनुपस्थिति पाई गई तो उनकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी । जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिहर प्रसाद ने बताया कि अध्यापकों की घोर लापरवाही के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में हो रहा था ।






 शासकीय कार्यों में लापरवाही तथा पद की गरिमा को धूमिल करने सहित अन्य कई कारणों को लेकर निलंबन की कार्यवाही की गई है । उन्होने बताया कि यदि जांच में निलंबित अध्यापक अध्यापिका ने पूरा सहयोग नहीं किया और संबंधित विद्यालय में निलंबन के दौरान अपनी उपस्थिति बराबर दर्ज नहीं कराई तो उनकी सेवाएं भी समाप्त की जा सकती है । बीएसए की इस कार्यवाही से शिक्षा जगत में हड़कंप मचा हुआ है ।

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