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BASTI:तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ के उद्घोष के साथ मनायी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती









सुनील उपाध्याय 
बस्ती :तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा’’ इस उद्घोष के साथ देश की आजादी के लिए ऐतिहासिक योगदान करने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयन्ती पर जिला पंचायत सभागार बस्ती में बलिदानों से मिली आजादी विषयक गोष्ठी का आयोजन नवसंवत स्वागत समिति बस्ती द्वारा किया गया जिसमें सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, सावित्री विद्या विहार, सेंट्रल एकेडमी, डॉन वॉस्को हाई स्कूल, उर्मिला एजुकेशनल एकेडमी, स्वामी दयानंद विद्यालय, यूनिक साइंस एकेडमी, एसपी चिल्ड्रेन एकेडमी, जीवीएम कान्वेंट तथा बाबू मिश्री लाल आर्य कन्या इंटर कॉलेज के बच्चों ने प्रतिभाग किया।






 इस अवसर पर कार्यक्रम का शुभारम्भ नेताजी के चित्र पर माल्यार्पण के द्वारा राजेंद्र नाथ तिवारी, योगेश शुक्ल एवं अखिलेश दुबे द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते अनुराग शुक्ल ने सुभाष जी के व्यक्तित्व व कृतित्व से प्रेरणा लेने की बात कही। गरुण ध्वज पाण्डेय व पंकज त्रिपाठी के नेत्त्व में दीक्षा यादव, प्रिया पाण्डेय, माही गुप्ता, श्री कुमार वर्मा, अभिजीत चैधरी, रोशनी खान, अमर पाण्डेय, जया पाण्डेय, आदित्य उपाध्याय, सृष्टि पाण्डेय आदि बच्चों ने बच्चों ने नेता जी के जीवन से जुड़ी घटनाओं को सुनाते हुए उनसे प्रेरणा लेने का संकल्प लिया। पूर्वांचल विद्वत परिषद के अध्यक्ष राजेन्द्र नाथ तिवारी ने कहा कि ऐसे देश के लाल को पाकर देश धन्य हो जाता है जिसकी सुदृढ़ एवं सुनियोजित योजना से अंग्रेज पूरी तरह भयभीत हो गए थे। 





आजाद हिंद फौज पूरी बलिदानों की फौज थी जो देश के लिए सर्वस्व अर्पण के लिए तैयार थे। भारत की युवा शक्ति पूरे विश्व की सर्वश्रेष्ठ युवा शक्ति सिद्ध हुई और देश को आजादी मिली। मुख्य वक्ता योगेश शुक्ल प्रधानाचार्य श्रीकृष्ण पाण्डेय इण्टर कालेज ने कहा बलिदान एक व्यापक शब्द है जिसमें तन मन एवं धन तीनों के बलिदानियों के लिए भारतवर्ष को युगों युगों तक याद किया जायेगा व इससे प्रेरणा ली जायेगी। भारत का इतिहास बलिदानों से भरा पड़ा है इन्हीं बलिदानों के कारण भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता है। 




इस धरती पर आजादी के लिए त्याग एवं बलिदानों की परम्परा विशेष रूप से 1757 से 1947 के बीच रही। इसके बलिदानों के नाम की लिस्ट बनाई जाए तो एक मोटी किताब बन सकती है। कहा कि आक्रमण हमेशा सम्पन्न देश पर ही होता है। भारत चूॅकी धन-धान्य, वैभव, ज्ञान आदि से सपन्न राष्ट्र था। इसलिए इसकी रक्षा के लिए बलिदानों की श्रृंखला भारत में लंबी होनी स्वाभाविक है। बलिदानियों में युवाओं की भूमिका अग्रणी रही है।



 नव सम्वत स्वागत समिति के अध्यक्ष अखिलेश दुबे ने शिक्ष, बच्चों व अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते कहा कि विद्यार्थियों व शिक्षकों पर आजादी के संरक्षण की विशेष जिम्मेदारी है। नेताजी ने अपने ज्ञान व पुरुषार्थ के बल पर आजादी हमें दिलाई थी इसलिए हर कीमत पर हमें बलिदानियों द्वारा प्राप्त आजादी की रक्षा करनी चाहिए। 






इस अवसर पर सावित्री शुक्ला, कमलोज मिश्रा, रमा श्रीवास्तव, रेनू यादव, जयशंकर त्रिपाठी, दिनेश मौर्य, विमल कुमार भट्ट, संजय कुमार श्रीवास्तव, सुभाष मणि त्रिपाठी, रामचंद्र दुबे, ओम प्रकाश मिश्र आदि सहित विद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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