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basti:मनुष्य का शरीर ही वह कुरूक्षेत्र है जहां निवृत्ति और प्रवृत्ति का युद्ध होता रहता है:शिवानन्द जी महाराज










सुनील उपाध्याय
बस्ती । हनुमानजी की कृपा के बिना प्रभु श्रीराम के दर्शन नहीं होेते। ‘‘ राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे’’। हनुमान जी ब्रम्हचर्य के स्वरूप है। हनुमान जी को कौन उपदेश दे सकता है, वे तो सकल विद्या के आचार्य है। हनुमान जी ही संसार समुद्र को पार कराने में समर्थ है। यह सद् विचार दद्दन तिवारी ने  श्री बाबा झुंगीनाथ धाम में आयोजित 8 दिवसीय शतचण्डी श्रीराम महायज्ञ के पांचवे दिन व्यक्त किया। कथा स्थल पर श्रद्धा के साथ श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया गया। 







कथा व्यास महाराज दद्दन तिवारी ने  राम जन्म के महिमा का गान करते हुये कहा कि श्री राम की मर्यादा जीवन में उतारने से रामनवमी का उत्सव पूर्ण होता है। सृष्टि में जब-जब अन्याय, पापाचार बढता है परमात्मा विविध रूपों में अवतार लेते हैं।  सांसारिक विष जब भी जलाने का प्रयास करें तो रामनाम को जप करना चाहिये। भारत कर्म भूमि है इस कर्म भूमि में जैसा कर्म करते है वैसा फल मिलता है। 




कथा पाण्डाल में जैसे ही श्रीराम का जन्म हुआ ‘भए प्रगट कृपाला, दीन दयाला, कौशल्या हितकारी’’ के गान के साथ वातावरण प्रसन्नता से भर गया। श्रद्धालु भक्तों ने फूलों की वर्षा किया और सिया वरराम चन्द्र की गूंज से कथा पाण्डाल गूंज उठा। विप्र धेनु सुर सन्त हित, लीन्ह मनुज अवतार। निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार।। के  माध्यम से श्रीराम जन्म के कारको की व्याख्या करते हुये महात्मा जी ने कहा कि ‘बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना।कर बिनु करम करइ विधि नाना।। परमात्मा सर्व सर्मथ है। जैसे ही श्रीराम का जन्म हुआ आकाश से देव और गन्धर्वो ने पुष्प वर्षा किया। 




शिवानन्द जी महाराज ने भागवत महिमा का गान करते हुये कहा कि तक्षक जगत से पृथक नही है, वह भी ब्रम्ह रूप है। शुकदेव जी ने परीक्षित को ब्रम्ह का दर्शन कराकर निर्भय कर दिया।   कथा सुनकर जीवन में उतारेंगे तो श्रवण सार्थक होगा। मनुष्य का शरीर ही वह कुरूक्षेत्र है जहां निवृत्ति और प्रवृत्ति का युद्ध होता रहता है। इस शरीर रथ को जो श्रीेकृष्ण के हाथों में सौंप देता है उसे विजय श्री मिलती है । 





  आयोजक धु्रव चन्द्र पाठक के साथ ही  रामकेवल यादव, विनोद पाण्डेय, पुजारी जय प्रकाश तिवारी, शीतला गोस्वामी, रामबोध दूबे,  बाजा चौबे, राजेन्द्र यादव, विद्या मिश्रा, दया पाण्डेय, वंदना पाण्डेय, रंजना पाठक, कान्ती पाठक, गायत्री पाण्डेय, इन्द्रमती शुक्ल, डा. आर.के. सिंह, ओम प्रकाश पाठक, माता बदल पाठक, आशाराम यादव, गुरूचरन, दामोदर, हीरा व अन्य श्रद्धालु भक्तों ने कथा रस का पान किया। डा.  अवधेश पाण्डेय के मार्ग दर्शन में यज्ञ अनुष्ठान सम्पन्न हो रहे हैं।

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