सुनील उपाध्याय
बस्ती । देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति दिलाने में अग्रणी योगदान करने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को उनके 122 वीं जयंती पर याद किया गया। कायस्थ वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय के मण्डल अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में बुधवार को वाहिनी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने फौव्वारा तिराहा स्थित नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन् किया गया।
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुये वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि देश के इतिहास में ऐसा कोई व्यक्तित्व नहीं हुआ जो एक साथ महान सेनापति, वीर सैनिक, राजनीति का अद्भुत खिलाड़ी और अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरुषों, नेताओं के समकक्ष साधिकार बैठकर कूटनीतिज्ञ तथा चर्चा करने वाला हो। भारत की स्वतंत्रता के लिए सुभाष चंद्र बोस ने करीब-करीब पूरे यूरोप में अलख जगाया।
वाहिनी प्रमुख पंकज भैया ने कहा कि महात्मा गाँधी के नमक सत्याग्रह को ‘नेपोलियन की पेरिस यात्रा’ की संज्ञा देने वाले सुभाष चंद्र बोस का एक ऐसा व्यक्तित्व था, जिसका मार्ग कभी भी स्वार्थों ने नहीं रोका, जिसके पाँव लक्ष्य से पीछे नहीं हटे, जिसने जो भी स्वप्न देखे, उन्हें साधा और जिसमें सच्चाई के सामने खड़े होने की अद्भुत क्षमता थी।
वाहिनी के मण्डल अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जब भारत स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत था और नेताजी आजाद हिंद फौज के लिए सक्रिय थे तब आजाद हिंद फौज में भरती होने आए युवक-युवतियों को संबोधित करते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने कहा, ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।’ सुभाष चंद्र बोस का यह वाक्य आज भी हमें रोमांचित करता है। यह वाक्य सिद्ध करता है कि जिस व्यक्तित्व ने इसे देश हित में सबके सामने रखा वह किस जीवट का व्यक्ति रहा होगा।
कार्यक्रम से एक दिन पूर्व वाहिनी पदाधिकारियों ने नेताजी की प्रतिमा की साफ-सफाई किया। जयंती अवसर पर बी.के. श्रीवास्तव, सिद्धार्थ श्रीवास्तव, प्रशान्त श्रीवास्तव, रामानन्द ‘नन्हें’ अनिल कुमार पाण्डेय, अमर सोनी, आनन्द श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, विपुल आनन्द श्रीवास्तव, अजीत श्रीवास्तव, देव श्रीवास्तव, भोलू श्रीवास्तव, अंशुमान, मुकेश श्रीवास्तव, अखिलेन्द्र श्रीवास्तव, साहिल, दुर्गेन्द्र श्रीवास्तव, संजय कुमार, उमेश श्रीवास्तव, राजकुमार आदि ने योगदान दिया।


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