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प्रयागराज:विभिन्न प्रांतों के लोग यहां पर आते हैं, संकल्पों को पूरा करने








संकल्प: तेरा मेरा साथ बना रहे, सात जन्मों तक...
सुनील गिरि
प्रयागराज। दिव्य कुंभ मेला क्षेत्र अर्थात संगम वह स्थल है, जहां हर कोई अलग-अलग इच्छाओं/लालसाओं को लेकर पहुंचते हंै। कुछ तो यहां सनातन धर्म की परंपरा का निर्वाह करने तो कुछ मोक्ष की कामना से आते हैं। संकल्प ऐसा जो पूरा हो। आस्था की नगरी प्रयागराज के पावन पवित्र संगम तट पर नित नए संकल्प लिए जाते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो विवाह के दौरान लिए गए संकल्पों को दोहराने और सात जन्मों के बंधन में जन्म-जन्मांतर तक निभाने के लिए आते हैं। सात जन्मों तक का साथ एक दूसरे से बना रहे इसके लिए संकल्पों को पूरा करते हैं। यह परंपरा दक्षिण भारतीयों में पाई जाती है और स्थानीय भाषा में इसे वेणीदान भी कहा जाता है। 





जीवन साथी के प्रति इसी अगाध आस्था व विश्वास की डोर के साथ संगम क्षेत्र के दिव्य कुंभ में गुलजार है। आस्था की नगरी प्रयागराज के संगम तट पर माद्य मास के दिव्य कुंभ मेले के दौरान देश के साथ ही विश्वभर के श्रद्धालु पहुंचते हैं, संगम स्नान कर नित नए संकल्प को लेते हैं और संकल्पों को पूरा भी करते हैं। वहीं एक संकल्पों में एक संकल्प ऐसा भी है जो दक्षिण भारतीयों के जीवन के लिए खासा महत्व व मायने रखता है और इसके बगैर जीवन अधूरा माना जाता है। जिसे स्थानीय भाषा में इसे वेणीदान कहते हैं। 




विवाह के मंडप के नीचे लिए गए संकल्प को निभाने व उसकी यादों को ताजा करने के लिए दक्षिण भारत समेत कई अन्य प्रांतों से लोगों का संगम क्षेत्र में पहुंचना जारी है। संकल्पों को दोहराने अर्थात वेणीदान की प्रक्रिया की शुरूआत घाट पर मौजूद पंडों के निर्देशन में होती है। जिसमें संकल्प को दोहराने वाला जोड़ा, यानि पत्नी व पति को संगम स्नान के साथ ही गंगा मईया की पूजा पाठ विधिविधान के अनुसार संपन्न कराया जाता है। इसके बाद विवाह के दौरान पहने गए परिधान को धारण करने के बाद मंत्रोच्चारण के साथ ही एक बार फिर विवाह की समस्त रश्में पूरी की जाती है। शादी के समय लिए गए संकल्पों को दोहराया जाता है।



संगम तट पर विवाह के दौरान लिए गए संकल्पों को पूरा करने के बाद पति व पत्नी परंपरा के मुताबिक गंगा मईया से अर्शिवाद की आपेक्षा करते हैं कि वह इसी प्रकार सात जन्मों तक दोनों का साथ बना रहे। 

चली आ रही है परंपरा
 भारतीय संस्कृति/परंपरा के आगे दुनिया नतमस्तक है। वर्तमान में प्रयागराज के संगम नगरी में दिव्य कुंभ मेले में वर्षों पूर्व चली आ रही परंपरा को लोग पूरा कर पूण्य कमानें में लगे हैं। परंपरा ही है कि जिसे स्थानीय भाषा में वेणीदान कहते हैं। दक्षिण भारतीयों के बड़ा ही महत्व रखता है, विवाह के दौरान लिए गए संकल्पों को कुंभ व महाकुंभ में पूरा करने सेे इसका महत्व और बढ़ जाता है। यही वजह है कि कुंभ और महाकुंभ के दौरान संकल्पों को पूरा करने के लिए दक्षिण भारत समेत अन्य कई प्रांतों में रहने वाले सहित दक्षिण भारत के वो लोग जो देश के बाहर निवास करते हैं वह भी विवाह के दौरान लिए गए संकल्पों को परंपरा के मुताबिक शुभ मुहर्त में संगम तट पर आकर पूरा करते हैं। 

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