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अयोध्या में सन्त शिरोमणि गुरु रविदास की जयंती धूमधाम से मनी










 वासुदेव यादव
अयोध्या। हनुमान कुंड स्थित श्री रविदास मन्दिर पंचायती सेवा समिति के प्रांगण में अध्यक्ष व मंदिर के महंत बनवारी पति उर्फ ब्रहमचारी जी महाराज के पावन सानिध्य में संत शिरोमणि रविदास जी की पुण्य तिथि धूमधाम से मनाई गई। सुबह रविदास जी का विधि-विधान पूर्वक पूजन अर्चन कीर्तन के साथ ही संतो महंतों के प्रवचन के साथ आरंभ हुआ। दोपहर को दिव्य अलौकिक ज्ञान गोष्टी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ महन्त बनवारी पति उर्फ ब्रह्मचारी के द्वारा गुरु रविदास व डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुआ । 





 इस सभा को संबोधित करते हुए महन्त श्री ब्रह्मचारी ने कहा कि गुरु रविदास जी का विचार धारा आज भी प्रासंगिक है। उनके बताए हुए मार्ग  आज भी बहुत सार्थक है। वे समाज में एकता शांति का संदेश देते हुए राष्ट्र को आगे बढ़ाएं । अज्ञानता पर आधारित वर्ण व्यवस्था में निम्न वर्ग में वे जन्मे जरूर थे लेकिन उनकी विचारधारा उच्च कोट की थी ।वे विश्व के आदित्य परम विद्वान व विचार भूषण थे। उनके विचारधारा से लाखों लोग प्रभावित हुए तथा उनका शिष्य बन कर आगे बढ़े। वे अज्ञानता पर आधारित वर्ण व्यवस्था छुआछूत अंधविश्वास पाखंड आडंबर भूत प्रेत भाग्य स्वर्ग नरक पर विश्वास नहीं रखते थे । वह अपने कर्मों पर ही विश्वास रखते थे। अपने बारे में स्वयं ही वे कहा करते थे कि विज्ञान को मानो आगे बढ़ो। वे सर्व समाज के गरीब असहाय मजलूम दलितों पिछड़ों को आगे बढ़ाएं।




 जबकि महन्त निराला दास ने कहा कि गुरु रविदास जी परम विद्वान थे। दीन दुखियों को सुख देने व उनके अधिकारों को दिलाने के लिए जन्म लिए थे । मन्दिर के उत्तराधिकारी आचार्य अवधेश दास ने प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु रविदास जी के विचारधारा से प्रभावित होकर संविधान रचयिता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने  आडम्बर पाखण्ड व बुराइयों का विरोध करके निचले तबके का नेतृत्व किया और भारतीय संविधान लिखा जोकि सबसे बड़ा संविधान है ।


 भारतीय संविधान भारत की सबसे बड़ी धरोहर है। लेकिन कुछ सामंती लोग इसे बदलना चाहते हैं। वे मनुस्मृति लाना चाहते है, जो गलत है। इसे रोकना होना। जबकि अयोध्या हनुमानगढ़ी के महंत बाबा भवनाथ दास ने कहा कि गुरु रविदास जी गरीबों दलितों पिछड़ों के मसीहा हैं। उनके बताए हुए मार्ग पर हमको चलना चाहिए । इस दौरान कई प्रांतों जिलों से हजारों की संख्या में सन्त महन्त शिष्यगण आदि शामिल रहे । कार्यक्रम में  राम आधार दास सरजू दास अमर सिंह शतानंद राम रामलौट सी एल गौतम जसवंत राम प्रकाश उमाशंकर संत राम जी शालिग्राम सागर पुन्नूलाल राम लखन दास डॉ दीनाथ आदि रहे।


  कार्यक्रम के अंत में आए हुए सभी अतिथियों का मंदिर के व्यवस्थापक महन्त बनवारी पति उर्फ ब्रह्मचारी, संत निराला दास व अवधेश दास द्वारा स्वागत सम्मान किया गया।

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