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सपा नेता पर कब्रिस्तान की जमीनों पर कब्जे के साथ ही ग्राम समाज व खलिहान की जमीनों को बेचने का आरोप








सपा प्रत्याशी के गले की फांस बन सकता है पूर्व मंत्री के करीबियों का कारनामा
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। समाजवादी पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान सदर विधानसभा क्षेत्र के खोरहंसा निवासी पिता-पुत्र द्वारा की गई कारस्तानियां गठबंधन प्रत्याशी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह की राह में रोड़ा बन सकती हैं।


 विपक्ष ने पंडित सिंह के मंत्रित्वकाल में हुए चिश्तीपुर कब्रिस्तान प्रकरण का जिन्न बाहर निकालकर उसे भुनाने का प्रयास शुरू कर दिया है। आरोप है कि सपा शासनकाल में पिता-पुत्र ने पूर्व मंत्री की शह पर उक्त कब्रिस्तान की जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की थी, जिसमें ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे भी चले थे। इस बहुचर्चित मामले में पूर्व विधायक स्वर्गीय मोहम्मद जलील खां, उनके परिजनों तथा समर्थकों के विरूद्ध बल्बा, जानलेवा हमला सहित विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।
     

बताते चलें कि अखिलेश यादव सरकार के दौरान खोरहंसा निवासी सपा नेता तथा पूर्व मंत्री पंडित सिंह के करीबी माने जाने वाले पिता-पुत्र ने गोण्डा-अयोध्या नेशनल हाईवे पर चिश्तीपुर में स्थित कब्रिस्तान की बेशकीमती जमीन पर सत्ता की हनक और मंत्री पंडित सिंह के रसूख के बल पर जबरन कब्जा करने पहुंच गए जिसका चिश्तीपुर गांव के लोगों ने विरोध किया। सत्ता के नशे में चूर रहे पिता-पुत्र ललकारते हुए गांव वालों से भिड़ गए। इस बीच गांव के तमाम लोग इकट्ठा हो गए और दोनों तरफ से ईंट-पत्थर व लाठी-डंडे चलने लगे। 


इस मामले में बीच बचाव के लिए बसपा के पूर्व सदर विधायक मोहम्मद जलील खां पहुंचे थे, लेकिन मनबढ़ों ने उन्हें भी नहीं बख्शा था। इस प्रकरण में स्वर्गीय जलील खां, उनके परिजनों तथा समर्थकों के विरूद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। सत्ता के रसूख ने बेहद शरीफ और ईमानदार नेता जलील खां को तोड़ दिया था। 


उस समय सांसद बृजभूषण शरण सिंह उनके घर पहुंचे थे और उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिलाते हुए प्रशासन को भी ललकारते हुए कहा था कि यदि पूर्व विधायक जलील खां तथा उनके परिजनों और समर्थकों के साथ सत्ता के प्रभाव में आकर अन्याय करने अथवा उत्पीड़न की चेष्टा की गई तो कतई अच्छा नहीं होगा। सांसद बृजभूषण के तेवर के बाद जलील खां को काफी हद तक राहत मिली थी। हालांकि कब्रिस्तान प्रकरण ज्यों का त्यों बरकरार है। 


पिता-पुत्र पर खोरहंसा, गोण्डा, मसकनवा तक के तमाम बेरोजगारों से नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने, चिश्तीपुर के साथ ही नूरी मस्जिद, बड़ी मस्जिद के पास स्थित कब्रिस्तान की जमीनों पर कब्जा करने, ग्राम समाज व खलिहान का स्वरूप बदलकर ऊंचे दामों पर बेचने के आरोप लगाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि खोरहंसा पॉवर हाउस के पास हाइवे से अटैच बेशकीमती जमीन को भी राजस्व कर्मियों की साठगांठ से कब्जा कर ऊंचे दाम में बेच दिया गया है।



     चूंकि, पिता-पुत्र पूर्व मंत्री और गोण्डा लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी पंडित सिंह के खास माने जाते हैं, इसलिए विपक्ष ने इनकी कारस्तानियों को भुनाना शुरू कर दिया है। सोमवार को विश्वनागा में हुई भाजपा प्रत्याशी की नुक्कड़ सभा में इसे उठाकर हवा देने की कोशिश की गई। इससे एक बार फिर चिश्तीपुर कब्रिस्तान का जिन्न चुनावी मौसम में बाहर निकल आया है। लोगों का कहना है कि चूंकि पिता-पुत्र के हर सही और गलत कामों में पूर्व मंत्री पंडित सिंह का संरक्षण होता था, इसलिए उनके चुनाव पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
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