जनसभा में उमड़े हजूम ने विरोधियों के सर पर चिंता की लकीरें
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। बीते दिन प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों के नामांकन पत्र के दाखिल होने के साथ ही नामांकन की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है। जिसके बाद नामांकन पत्र की जांच और पर्चा वापसी ही आज के बाद प्रारंभ हो जाएगा।
जिसके बाद सभी पार्टी अपने अपने प्रचारक और नेताओं के सहारे जनसभाओं का आयोजन सम्पन्न होगा। इसीक्रम में नामांकन की प्रक्रिया के बाद अब जबरदस्त रणक्षेत्र का गवाह बनेगा संतकबीरनगर लोकसभा की सीट। जुताकाण्ड के बाद संतकबीरनगर लोकसभा सीट पूरे विश्व में चर्चा का केंद्रबिंदु बन गया था।
जिसमे दो सामंती मानसिकता से ग्रसित माननीयों ने अपने पद और गरिमा को तार तार करते हुए पूरे देश मे भाजपा के छवि को चोट पहुचाने का किया है। वैसे तो पूरे उत्तरप्रदेश में जाति पांति के खांचे में सीट को रखकर ही सभी पार्टियों ही सीट का चुनाव करती है। जिससे संतकबीरनगर भी अछूता नही रहता है।
कुछ माह पूर्व ही एक वायरल वीडियो भी एक जाति विशेष की टिप्पणी जो एक माननीय पर ही आरोप लगा था। अब इन सब विवादों से निकल कर भाजपा ने पिछड़ी पर दांव खेला है जबकि गठबंधन के प्रत्याशी ने सवर्ण पर दांव लगाई है। जिससे यह मुकाबला पहले दो तरफा था अब जबकि अंत मे जब कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी का टिकट काटकर लोकप्रिय पूर्व सांसद भालचन्द्र यादव को दिया है। तब से यह सीट अपने रोचक तथा कांटे की लड़ाई के लिए जाना जाएगा।
दो दिन पूर्व ही घोषित कांग्रेस के प्रत्याशी ने अपने दमखम का परिचय पहले ही दिन स्वागत हेतू जनसैलाब जुटाकर और रोड शो से अपनी ताकत का अहसास करवा दिया। जिससे अन्य विपक्षी पार्टियों को सकते में ला दिया। अब यह लड़ाई त्रिकोणीय लड़ाई में बदल चुकी है। पूर्व सांसद भालचन्द्र यादव अपने जमाने के एक कुशल पहलवान होने के साथ ही राजनीति के महारथी माने जाते है।
बसपा से राजनीति की शुरुआत कर हर वर्ग में इनके द्वारा कार्य किया गया जिससे इनकी छवि एक कुशल राजनेता व विकासपरक व्यक्ति की छवि बनी रही। जिससे अब संतकबीरनगर सीट पर कौन जीतेगा यह पूरी तरह से आने वाले 23 मई को ही पता चल पाएगा।


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