जिले में प्रसव कराने के लिए है सेफ डिलिवरी किट
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। जनपद में ऐसी संक्रमित महिलाओं के प्रसव के लिए सेफ डिलिवरी किट के साथ प्रशिक्षित प्रसूति रोग विशेषज्ञ भी उपलब्ध हैं। बच्चों में एचआईवी के संक्रमण को रोकने वाली दवा भी मुफ्त मिलती है। इस बाबत जिला एड्स कण्ट्रोल अधिकारी डॉ एस. डी.ओझा का कहना है कि संक्रमित गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केन्द्र में ही प्रसव करवाना चाहिए। उन्होने बताया कि केन्द्र सरकार की यह मंशा है कि एचआईवी पाजिटिव पिता या माता की संतानें एचआईवी निगेटिव हों।
इसके लिए जिला एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा व्यापक सावधानियां बरती जा रही हैं। जनपद की हर आशा को यह जानकारी दी गई है कि कोई भी महिला अगर गर्भवती होती है तो अन्य जांचों के साथ उसकी एचआईवी जांच अवश्य कराएं। जांचोपरान्त यदि महिला एचआईवी पाजिटिव पाई जाती है तो उसको तुरन्त ही बस्ती और गोरखपुर में स्थित एआरटी सेंटर पर ले जाएं। वहां पर उसे एचआईवी की दवाओं की नियमित डोज दिलाएं।
एचआईवी पीड़ित महिला को प्रसव के लिए पंजीकृत कराएं। प्रसव के दौरान उसे संस्थागत प्रसव केन्द्र पर ले जाएं। जहां पर सेल्फ डिलिवरी किट के जरिए उसका प्रसव कराया जाएगा। जन्म के 2 घण्टे से 72 घण्टे के भीतर नवजात बच्चे को दवा पिलाई जाएगी। उन्होने बताया इसके बाद एचआईवी के बच्चे में संचरण की संभावना 95 प्रतिशत तक समाप्त हो जाती है। आज तमाम एचआईवी पीडि़त दम्पतियों के बच्चे पूरी तरह से एचआईवी से मुक्त हैं।
गर्भवती महिलाओं की होती है एचआईवी जांच
महिलाएं जब गर्भवती होती हैं तो उनकी विभिन्न जांचों के दौरान एचआईवी की भी जांच की जाती है। ताकि उसके बच्चे को एचआईवी के संक्रमण से बचाया जा सके। गर्भावस्था के दौरान जांच में अगर यह पता लगता है कि महिला एचआईवी संक्रमित है तो उसे तुरन्त ही एआरटी सेंटर भेजकर एचआईवी के नियन्त्रण की दवाएं दी जाती हैं। यही नहीं उसे टीएलई की डोज दी जाती है। ताकि वह एक एचआईवी निगेटिव बच्चे को जन्म दे सके।


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