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शर्मनाक :अपने फायदे के लिए राजनेता मासूमों के शोषण से भी नहीं करते परहेज







अखिलेश्वर तिवारी 
अखिलेश की रैली में खुलेआम मासूमों बच्चों का किया गया नुमाइश
बलरामपुर ।। चुनाव के समय में सभी दलों के नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते हुए जुबानी जंग के निचले स्तर तक तो पहुंच ही चुके हैं परंतु अब अपने फायदे के लिए छोटे-छोटे मासूम बच्चों का शोषण तथा उनकी नुमाइश करने से भी नहीं चूक रहे हैं । 


ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला रेहरा बाजार में आयोजित अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा के दौरान सामने आया । इस जनसभा में छोटे-छोटे बच्चों के शरीर पर समाजवादी पार्टी का कलर व चुनाव चिन्ह तथा बहुजन समाज पार्टी का कलर पेंटिंग व चुनाव चिन्ह पेंट किया गया था । इतना ही नहीं बच्चों को कड़कड़ाती धूप में सुबह से शाम तक लोगों के मनोरंजन के लिए खड़ा रखा गया ।

                     
जानकारी के अनुसार 4 मई को विधानसभा क्षेत्र उतरौला के रेहरा बाजार में गोंडा लोकसभा क्षेत्र से सपा बसपा गठबंधन के समाजवादी पार्टी प्रत्याशी विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह के लिए आयोजित अखिलेश यादव की चुनावी जनसभा आयोजित की गई थी । इस जनसभा में कक्षा 5 के दो बच्चों के शरीर पर समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी का झंडा कलर वा चुनाव निशान बाकायदा पेंट किया गया था । पूरे शरीर पर पार्टी का निशान बना दिया गया था । 


मासूम बच्चों के शरीर पर पेंटिंग किए जाने के कारण उन्हें कपड़े पहनने की भी इजाजत नहीं थी । चंद पैसों की लालच में यह मासूम बच्चे कड़कड़ाती धूप में पूरे दिन रैली स्थल पर खड़े रहे और लोग मनोरंजन करते रहे । अखिलेश यादव ने जनसभा में पहुंचने के बाद इन बच्चों को मंच पर बुलाया और उत्साहवर्धन के नाम पर उनकी नुमाइश भी की गई । उन्हें इस कदर बेरहमी का शिकार करने वाला ग्राम प्रधान कहीं फूले नहीं समा रहा था क्योंकि उसके इस करतूत की नेताओं द्वारा प्रशंसा की जा रही थी ।


 बच्चे भूखे प्यासे सभा स्थल पर लोगों का मनोरंजन कर रहे थे परंतु उनकी व्यथा सुनने वाला तथा देखने वाला वहां कोई नहीं था । मंच पर पहुंचने के बाद भी उन बच्चों की ओर ना तो वहां मौजूद प्रशासन ने संज्ञान लिया और ना ही समाज सेवा के नाम पर ठेका लेने वाले किसी संगठन ने इस कृत्य का संज्ञान लिया ।अगर संज्ञान लिया तो केवल मीडिया ने जिसने इस अमानवीय कृत्य का पर्दाफाश करते हुए बच्चों से बात की और उनकी व्यथा को सामने लाने का निश्चय किया । 


हमारे प्रतिनिधि द्वारा बच्चों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इससे पहले भी उन्हें इसी प्रकार जनसभाओं में प्रयोग किया गया है । पहले की जनसभाओं में उन्हें ₹220 एक दिन का दिया गया था । इस बार कितना मिलेगा इसका अभी उन्हें पता नहीं है । 

अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या राजनेताओं को अपने फायदे के लिए किसी के जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार है ? गरीबों, मासूमों, बेरोजगारों के हितेषी कहने वाले ये नेता क्या इन मासूमों की व्यथा को नहीं देख रहे हैं ? उन्हें न्याय दिलाने के बजाय उनका उत्साहवर्धन करने के नाम पर उनकी मंच से नुमाइश की जा रही है और हमारे बीच के चंद लोग तालियां बजाते हुए जिंदाबाद के नारे लगाते हैं ? क्या यही है असली भारत की तस्वीर ? क्या ऐसे ही देश को संबोधित करेंगे राजनेता ? ऐसे तमाम सवाल हैं जो लोगों के जेहन में उठ रहे हैं और उनका जवाब तमाम पार्टियों के नेताओं को देना पड़ेगा । यह भी देखना होगा कि इस खबर का कितना संज्ञान चुनाव आयोग तथा चुनाव से जुड़े अधिकारी ले रहे हैं ।

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