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हर तीन वयस्‍क में से एक है बी0 पी0 का शिकार : डॉ ओ पी चतुर्वेदी






संतुलित भोजन, सही वजन, व्‍यायाम के जरिए नियन्त्रित हो सकता है उच्‍च रक्‍तचाप
 शहरी क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले रक्‍तचाप वाले मरीजों की संख्‍या है अधिक
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। उच्‍च रक्‍तचाप एक साइलेंट किलर है। इससे बचने के लिए हममें अपने खान पान के साथ ही जीवन शैली को भी बेहतर रखना होगा। रक्‍तचाप को जड़ से मिटाने के उद्देश्‍य से ही वर्ष 2005 से ही हर साल 17 मई को विश्‍व रक्‍तचाप दिवस मनाया जाता है।  


जिला संयुक्‍त चिकित्‍सालय के चिकित्‍सक डॉ ओ पी चतुर्वेदी ने बताया कि उच्च रक्तचाप को संतुलित भोजन लेकर, व्यायाम शरीर का सही वजन रखकर तथा सक्रिय रहकर नियंत्रित किया जा सकता है। प्राथमिक रोकथाम के लिए आहार में सोडियम की मात्रा को सीमित रखें फलों सब्जियों को अधिक शामिल करें। अनियंत्रित उच्च रक्तचाप बेहद खतरनाक होता है, जो हृदय, गुर्दे मस्तिष्क  को क्षतिग्रस्त कर सकता है। यदि समय पर संपूर्ण उपचार नहीं किया जाए तो इससे मरीज की मौत तक हो सकती है। भारत में हर तीन व्यस्क में से एक के उच्च रक्तचाप से ग्रसित होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन के अनुसार शहरी क्षेत्र में 42 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र के 25 प्रतिशत व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीडि़त हैं। उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप मोटापे, धूम्रपान, अधिक नमक, शराब, जैनेटिक तनाव के कारण होती है। रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने के लिए वजन कम करने, धूम्रपान छोडऩे, शराब का सेवन बंद करने, नियमित रूप से व्यायाम करने, स्वास्थ्यदायक आहार लेने नमक का सेवन नियंत्रित करना होगा।


बच्‍चे भी हो रहे हैं उच्‍च रक्‍तचाप का शिकार
डॉ चतुर्वेदी बताते हैं कि खेल मैदानों में जाने की आदत छोड़ना, टीवी या मोबाइल पर अधिक समय व्यतीत करना, पौष्टिक आहार के बजाय जंक फूड का लगातार सेवन करने से बच्चे भी उच्च रक्तचाप के शिकार हो रहे हैं। परिणामस्वरूप बड़ों को होने वाली हृदय रोग, किडनी, आंखों की समस्याएं बच्चों में भी बढ़ रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि आमतौर पर पहले 40 या इससे अधिक आयु वर्ग के लोगों में रक्तचाप की समस्या रहती थी। पिछले आठ दस साल में यह समस्या बच्चों में भी आम होने लगी है।


दवा शुरू करने के बाद बंद करना खतरनाक
डॉ चतुर्वेदी आगे बताते हैं कि समाज में उच्च रक्त चाप और निम्न रक्तचाप गंभीर समस्या बन रही है। जीवनशैली में अनियमितता मसलन खानपान में गड़बड़ी, कब्ज की समस्या, अच्छी नींद न सो पाना और नमक का अधिक सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल से बाहर हो जाता है। एक बार बीपी की दवा लेना शुरू करने के बाद बीच में बंद नहीं करनी चाहिए। इससे लकवा, हृदयाघात जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। नियमित अंतराल पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। बिना सलाह के दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।


उच्‍च रक्‍तचाप वाले लें यह आहार
पालक और हरी पत्तेदार सब्जि़यों में आयरन, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बढ़े हुए ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने में मददगार साबित होते हैं। लोबिया, सोयाबीन और राजमा जैसी फलियों (बीन्स) में घुलनशील फाइबर सहित पोटेशियम और मैग्नीशियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसलिए इनका सेवन ब्लडप्रेशर को नियंत्रित करने के साथ दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित होता है। शरीर में रक्त प्रवाह को संतुलित बनाए रखने में पोटैशियम और सोडियम का सेवन ज़रूरी होता है। अत: जिन लोगों को डायबिटीज़ की समस्या नहीं है, उनके लिए उबले आलू का सेवन भी फायदेमंद होता है। अगर डायबिटीज़ की समस्या न हो तो रोज़ाना सुबह नाश्ते के साथ पोटैशियम से भरपूर केले का सेवन ब्लडप्रेशर को संतुलित बनाए रखने का सबसे आसान उपाय है।

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