गठबंधन के प्रत्याशी को मिली इस विस में सबसे बड़ी हार
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। इस बार मोदी के सुनामी होने का बाद भी संतकबीरनगर की सीट की काफी टक्कर की रही। मोदी की प्रचंड सुनामी में भी जाति और धर्म के खिलाड़ी काफी हद तक असफल रहे। सपा बसपा के गठबंधन से भाजपा के सीटो पर काफी क्षति का आकलन लोगो द्वारा किया जा रहा था। जिसकी संभावना हर शहर ग्राम के चौराहों पर चल रही थी लेकिन नतीजे जब आने लगे तो मोदी के सुनामी में गठबंधन की हवा ही निकल गई।
प्रदेश में बड़े बड़े सूरमाओं के हारने से राजनीति के धुरंधरों को सोचने पर मजबूर कर दिया। भाजपा के इतनी प्रचंड लहर में जाति धर्म के नाम पर बना महागठबंधन तो फ्लॉप ही दिख रहा है। इसीप्रकार से संतकबीरनगर सीट जुताकाण्ड के बाद वर्तमान सांसद विधायक के आचरण की हर तरफ निंदा हो रही थी। इसी कारण वर्तमान सांसद का टिकट कटने के बाद मेंहदावल विधानसभा में जाति समीकरण में वोटो के बटने की चर्चा होने लगी थी।इन सभी चर्चाओं से ऊपर उठकर मेंहदावल विधानसभा में योगी और मोदी के कार्यो पर वोट पड़ा। जिसका काफी हद तक श्रेय विधायक राकेश सिंह बघेल और भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं को जाता है। मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल सहित सभी कार्यकर्ताओं ने भाजपा के प्रत्याशी को विजयी दिलवाने में अथक परिश्रम किया गया।
जिसके परिणाम स्वरूप बीते 23 मई को जब मतों की गिनती समाप्त हुई तो मेंहदावल विधानसभा के एकाध बूथ पर छोड़कर बाकी सभी मे भाजपा ही हावी रही। जातियों के दम पर बसपा से टिकट पाए प्रत्याशी को यहां पर लगभग 37 हजार से ज्यादे मतों से पिछड़ना काफी हानि कर दिया। संतकबीरनगर लोकसभा सीट की पांचों विधानसभा में मेंहदावल विधानसभा सबसे भाजपा के लिए मतों के लिहाज से अव्वल रहा। यहाँ पर भाजपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद को 110318 एवं निकटम प्रतिद्वंद्वी को 73168 मत ही प्राप्त हो सका। कांग्रेस के प्रत्याशी को भी यहां पर 39009 मत प्राप्त हुए। इस तरह से मेंहदावल में भाजपा के मत से विधायक के रूतबे को बढ़ाने का कार्य किया जो एक तरह से भाजपा को पूर्णतया विजय की ओर ले गई।


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