अखिलेश्वर तिवारी
बजट के अभाव में महा विद्यालय का भवन हुआ ध्वस्त
बलरामपुर ।। प्रदेश की योगी सरकार भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए तमाम दावे कर रही है परंतु जनपद बलरामपुर में इस दावे का कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है । आज हम बात कर रहे हैं एकमात्र संस्कृत महाविद्यालय की जो प्रशासनिक उदासीनता के चलते पूरी तरह से जमीदोष हो चुका है । हालात इतने बदतर है की विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए जगह नहीं बची है । तमाम गुहार के बावजूद ना तो शासन कोई ध्यान दे रहा है और ना ही प्रशासन । ऐसे में सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटकता दिखाई दे रहा ।
जानकारी के अनुसार जनपद बलरामपुर में कुछ वर्ष पूर्व तक दो संस्कृति महाविद्यालय संचालित हो रहे थे । जिला मुख्यालय पर संचालित हो रहे दो संस्कृत महाविद्यालयों में से एक संसाधनों के अभाव में बंद हो चुका है तथा दूसरा अब बंद होने के कगार पर है । महाराजा पाटेश्वरी प्रसाद संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलरामपुर स्टेट की पुरानी बिल्डिंग में संचालित हो रहा है । यह बिल्डिंग इतनी पुरानी तथा रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुकी थी कि इसी वर्ष 13 जुलाई को वर्ष बरसात होने पर पूरी तरह से ध्वस्त हो गई ।
बिल्डिंग के अंदर कमरे में रखे तमाम संसाधन भी उसी में दबाकर समाप्त हो गए । स्टेट बलरामपुर तथा स्थानीय लोगों के चंदे से तीन कमरों का निर्माण विद्यालय प्रबंधन द्वारा कराया गया है जिसमें जरूरी सामानों को रखा गया है तथा एक-एक कमरे में कई कक्षाओं के विद्यार्थी बैठते हैं ।
विद्यालय के प्राचार्य देव मित्र त्रिपाठी का कहना है कि एक ही परिसर में माध्यमिक तथा महाविद्यालय की कक्षाएं चल रही है जबकि नियमानुसार दोनों के लिए अलग-अलग बिल्डिंग होनी चाहिए उनका कहना है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी थी तो उम्मीद जागी थी कि अब संस्कृत विद्यालयों के अच्छे दिन आएंगे परंतु अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ । कई बार जिला विद्यालय निरीक्षक के जरिए विद्यालय भवन के लिए प्रस्ताव भेजे गए परंतु अभी तक कोई भी सहायता राशि उपलब्ध नहीं कराई गई ।
नतीजा रखरखाव के अभाव में इसी 13 जुलाई को महाविद्यालय भवन ध्वस्त हो गया । गरीमत रही की विद्यालय भवन रात्रि में गिरा यदि दिन में गिरा होता तो बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी । उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि महाविद्यालय के भवन निर्माण हेतु विशेष सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए । पूरे मामले पर जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश का कहना है कि उनकी जानकारी में इस समस्या को नहीं लाया गया ।विद्यालय प्रबंधन अपनी समस्या को सामने लाए तो यथासंभव सुधार कराए जाएंगे ।



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