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नहर कटने से हजारों एकड़ फसल हुई जलमग्न, स्कूल और गांवों में घुसा पानी


 ग्रामीणों में दहशत, कुंभकर्णी नींद सोए हैं जिम्मेदार अधिकारी 
ए. आर. उस्मानी
गोण्डा। मोतीगंज थाना क्षेत्र के मिश्रनपुरवा गांव के पास बीती रात सरयू नहर कट गई जिससे आसपास के हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई तथा कई गांवों के साथ ही इंटर कॉलेज में भी पानी घुस गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रबंधन ने स्कूल में छुट्टी कर दी। दूसरी तरफ पानी के भयावह रूप को देखते हुए ग्रामीण दहशतजदा हैं। हालांकि, सूचना के बाद नहर के पानी को रोक दिया गया है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
        
जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुंदरखी के मिश्रनपुरवा गांव के पास 7/8 अगस्त की रात में नहर कट गई। नहर ने जब अपना रूद्र रूप दिखाया तो हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई और मिश्रनपुरवा, खटिकन पुरवा समेत कई गांवों में पानी घुस गया। इतना ही नहीं, नहर से कुछ दूरी पर स्थित आर. एस. एम. इंटर कॉलेज में भी नहर का पानी घुस गया, जिससे सुबह जब बच्चे पढ़ने के लिए पहुंचे तो पानी का उग्र रूप देखकर सहम गए।

विद्यालय प्रबंधन ने स्थिति को देखते हुए स्कूल में छुट्टी कर दी और सुरक्षा के मद्देनजर बच्चों को उनके घर वापस भेज दिया गया। नहर कटने की सूचना ग्रामीणों द्वारा डायल 100, कहोबा चौकी तथा मोतीगंज पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही डायल 100 पीआरवी 0890 की टीम के आरक्षी अनिल यादव, आरक्षी लालबहादुर यादव व चालक उपेंद्र सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे और इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी।
इस बीच कहोबा चौकी के हेड कांस्टेबल श्रवण ओझा व कांस्टेबल राकेश कुमार कन्नौजिया भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए नहर कटने से उत्पन्न हुई विकराल स्थिति के अधिकारियों को अवगत कराया।
     
मिश्रनपुरवा गांव निवासी पंकज कुमार मिश्र, विजय मिश्रा, अजय मिश्रा, भगवानदीन, केशवराम, फुल्लुर मिश्रा, पिंटू मिश्रा, संजय, ओमप्रकाश, शिवकुमार, जल्ले, ओमकार, निरंकार, लाटबक्श तथा खटिकन पुरवा के सरजू सोनकर, गंगू सोनकर, आज्ञाराम, रामू सोनकर, राधे सोनकर, विश्राम, अयोध्या आदि किसानों ने बताया कि उनके साथ ही हजारों एकड़ गन्ने, धान आदि की फसल जलमग्न हो गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि नहर विभाग की लापरवाही के चलते तीसरी बार नहर कटी है। किसानों का कहना है कि जब पानी की जरूरत रहती है तब नहर सूखी रहती है और जब बरसात होती है तब नहर भी खोल दी जाती है जिससे जनहानि व धनहानि के साथ ही फसलों के रूप में आर्थिक नुकसान होता है।
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