■ प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने कार्यवाही की मांग
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। ग्रामीण जब अपने ही जनप्रतिनिधि के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण अपने जनप्रतिनिधि से कितना खासा नाराज होंगे। तस्वीर में जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं वह अपने ग्राम प्रधान के खिलाफ पीएम आवास में वसूली का आरोप लगा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है की प्रधान ने आवास दिलवाया लेकिन बदले में किसी से बीस हजार तो किसी से तीस हजार और कुछ ऐसे भी ग्रामीण मिले जिन से आधे पर सौदा तय कर लिया। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि जब उनका आवाज सूची में नामांकन आया तो ग्राम प्रधान ने जरूरत के दस्तावेज जमा करवाकर भुगतान के दौरान स्वयं ग्राम प्रधान लाभार्थियों को लेकर बैंक पहुंचे और धन निकासी करवाकर अपना हिस्सा लेकर चंपत होलिए। अब सवाल उठने लगा आवास लाभार्थी आखिर अपना आवास बनवाए तो कैसे..? सरकार से मिले धन से आवास बनवाना था और खुले आसमान के नीचे रह रहे लाभार्थियों को छत की आवश्यकता थी इसलिए कुछ ग्रामीणों ने कर्ज लिए तो कुछ नहीं ब्याज पर पैसा लेकर छत बनाएं लेकिन वह भी पीएम आवास और मॉडल के अनुरूप नही बना। लेकिन जिम्मेदारों ने अब तक लाभार्थियों का हाल तक जानने की कोशिश नहीं की। ग्राम प्रधान की वसूली से तंग आकर ग्रामीणों ने गांव में प्रदर्शन किया और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों में से एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि ग्राम प्रधान हर लाभार्थी से तो वसूली किया ही है लेकिन कुछ ग्रामीण ऐसे हैं जिनको पीएम आवास का झांसा देकर दस- दस हजार वसूला गया है। हालांकि प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों की बात में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। लेकिन सवाल जरूर उठता है कि आखिर ग्रामीणों से ग्राम प्रधान ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना से वसूली क्योंकि.? और प्रधान के द्वारा की गई वसूली में किस-किस ने अपना हिस्सा लिया और आखिर अब तक इस गुनाह पर पर्दा डालने के लिए जिम्मेदारों ने क्यों ठोस कदम नहीं उठाए.? फिलहाल मामला जो भी हो अब देखना होगा की जांच की आंच में कहीं सरकारी मिशनरी भी सरकार के सिस्टम को ठेंगा तो नहीं दिखा देगा या फिर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को निष्पक्ष न्याय मिल पाएगा।

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