■ आखिर यह कैसा पीएम आवास.?
आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। सरकार एक तरफ जरूरतमंदों को छत मुहैया करा रही है तो वहीं जिम्मेदारों ने वरिष्ठ अधिकारियों को अनदेखी कर सरकार के नियम और कायदे को ठेंगा दिखा दिया और मजे की बात तो यह है की एक तरफ जहां जांच पड़ताल और समय-समय पर निगरानी करने के लिए कमेटी गठित की जाती है उन्होंने भी कागजी कोर्रम को पूरा करके फर्जी लाभार्थी को पीएम आवास आवंटन से लेकर पूरा कराने में अपनी अहम भूमिका अदा कर डाली। लेकिन सवाल उठने लगता है कि वरिष्ठ अधिकारी ऐसे फर्जीवाड़े और जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते। चर्चा है कि ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान ने फर्जी आवास आवंटन कराने में अहम भूमिका अदा की और ब्लॉक स्तर के जिम्मेदार से मिलीभगत कर फर्जी तरीके से आवास आवंटित करवा दिया और अब इन दिनों उसी पीएम आवास में एक विद्यालय का संचालन और दुकान चलाई जा रही है। ऐसे में साफ है कि सरकार के मंसूबे पर पलीता लगाने के साथ-साथ पानी फेरने का भी काम जिम्मेदारों द्वारा किया जा रहा है।
मामला सेमरियावा ब्लॉक के मुसरत ग्राम पंचायत का है जहां पर क्षेत्र के रोजगार सेवक ने ही ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से मिलीभगत कर स्वयं फर्जी दस्तावेज लगाकर पीएम आवास आवंटित करवा लिया इतना ही नहीं आवंटित आवास में विद्यालय और दुकान का संचालन किया जा रहा है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हैं कि मामला संज्ञान में आने के बावजूद मौन साधे हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि रोजगार सेवक ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से मिलीभगत कर अनेकों फर्जी कारनामों को अंजाम दे चुका है लेकिन ब्लॉक स्तर के अधिकारी कार्यवाही करने का जहमत तक नहीं उठाना चाहते।

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