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सत्यं परम् धीमहि: पं. राधेश्याम शास्त्री


 वासुदेव यादव
अयोध्या। श्री राम मंदिर निर्माण की कामना से संचालित हो रहे संत तुलसीदास योग प्राकृतिक चिकित्सालय के सभागार में श्रीमद्भागवत के दौरान कथा विश्व प्रसिद्ध कथा व्यास पंडित राधेश्याम शास्त्री जी महाराज ने भागवत महापुराण के प्रथम श्लोक की ओर भक्तों का ध्यान आकृष्ट कराया। सत्यम परम धीमहि यानी हम सब परम सत्य परमात्मा का सदा ध्यान करें। झूठ बोलने पर हम कमजोर हो जाते हैं। सत्य के मार्ग पर अंदर से फल प्रतीत होता है। सत्य दो तरह से खोजा जा सकता है। एक तो तर्क से, मस्तिक से, सोच विचार से, दूसरा भाव से, अनुभूति से, मस्ती में गुनगुना कर और जिन्होंने गणित बिठाया है वह कभी सत्य तक नहीं पहुंचते हैं। ज्यादा से ज्यादा तथ्य तक पहुंचते हैं सत्य तक नहीं, तथ्य तक का यही भेद है। तथ्य आज तक सत्य लगता है। कल और खोजबीन होगी तो शायद सत्य ना लगे, विज्ञान रोज बदल जाता है। विज्ञान में तथ्य होते हैं, जो बदल जाएंगे। लेकिन जो बुद्धि ने जाना वह सत्य है। तथ्य होते हैं बाहर के, सत्य होते हैं भीतर के।
  इससे पूर्व कथा व्यासपीठ की यजमान व भक्तों ने आरती उतारी। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज ने किया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्त गणों ने श्रीमद् भागवत कथा सुन कर अपना जीवन जीवन धन्य किया ।
 कार्यक्रम में मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास, पंजाबी बाबा, कृष्ण वारिस सरकार, चंद्र प्रकाश मिश्रा सहित अन्य उपस्थित रहे।

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