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अब सभी जिलों में डाकिए पहुंचाएंगे टीबी मरीजों के सैम्पल


■ राज्य क्षय रोग और डाक विभाग में करार
■ पहले चरण में पांच जिलों में चला था प्रोजेक्ट

आलोक बर्नवाल
संतकबीरनगर। देश से वर्ष 2025 तक क्षय रोग (टीबी) के पूरी तरह से खात्मे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को तय समय सीमा से पहले पूरा करने के लिए प्रदेश में चलाये जा रहे कार्यक्रमों और योजनाओं  को धार देने की हरसंभव कोशिश की जा रही है । इसी क्रम में टीबी मरीजों के सैम्पल की जल्द से जल्द बेहतर जाँच कराने के लिए राज्य क्षय रोग विभाग और भारतीय डाक विभाग में मंगलवार को विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च) पर करार होने जा रहा है । इसके तहत अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में टीबी मरीजों का सैम्पल लैब तक पहुँचाने का काम डाकिये करेंगे । इससे पहले यह सैम्पल कोरियर से भेजे जाते थे, जिससे उसमें अधिक समय लगता था । पायलट प्रोजेक्ट के तहत लखनऊ समेत प्रदेश के पांच जिलों में पहले चरण में यह कार्यक्रम नौ महीने पहले चलाया गया था । उसमें सफलता मिलने के बाद विभाग अब यह बड़ा कदम उठाने जा रहा है ।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ एस डी ओझा ने राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता के हवाले से बताया कि टीबी मरीजों के मामले में सबसे बडी चुनौती जल्दी से जल्दी जाँच कराने की होती है क्योंकि एक टीबी मरीज अनजाने में न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है । इसी को देखते हुए डाक विभाग से करार किया गया है कि वह प्रदेश के करीब 2300 अधिकृत टीबी जाँच केन्द्रों से 24 घंटे के अन्दर 142 सीबीनाट मशीन सेंटर तक सैम्पल पहुँचाने का काम करेगा । इसके साथ ही 142 सीबीनाट मशीन सेंटर से प्रदेश के छह जिलों (लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, बरेली, मेरठ व वाराणसी) में स्थित ड्रग कल्चर टेस्ट सेंटर तक 48 घंटे के अन्दर सैम्पल पहुँचाने का काम करेगा । इससे जहाँ समय की बचत होगी वहीँ अनजाने में किसी को टीबी जैसी बीमारी की जद में आने से बचाया भी जा सकेगा । इसके साथ ही गोरखपुर में भी जल्द से जल्द ड्रग कल्चर टेस्ट सेंटर खोलने की तैयारी है । प्रयागराज, कानपुर, इटावा और झाँसी में भी इस तरह के सेंटर शुरू करने पर काम चल रहा है । इससे मरीजों को चिन्हित करने में और समय बचेगा और उनका इलाज भी जल्दी शुरू किया जा सकेगा ।

भारत के कुल टीबी रोगियों में 27 प्रतिशत यूपी में

विश्व के कुल टीबी रोगियों में करीब 20 फीसद भारत के हैं और भारत के कुल टीबी रोगियों में से करीब 27 फीसद उत्तर प्रदेश के हैं । इस बडी चुनौती का सामना करने के लिए प्रदेश पूरी तरह से कमर कस चुका है । इसमें डाक विभाग के अलावा पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार व श्रम विभाग का भी सहयोग लिया जा रहा है । इसके अलावा मिशन हेल्थ कार्यक्रमों व अन्य कार्यक्रमों के जरिये जागरूकता पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है ।

500 रुपया मिलता है पोषण भत्ता
क्षय रोग के जिला कार्यक्रम समन्‍वयक अमित आनन्‍द ने बताया कि सभी टीबी मरीजों के बेहतर खानपान के लिए इलाज के दौरान प्रतिमाह 500 रूपये दिए जाने की व्यवस्था की गयी है , सभी मरीजों को नियमित भुगतान किया जा रहा है । टीबी मरीजों के एचआईवी ग्रसित होने की अधिक सम्भावना होती है, जिसे देखते हुए वर्ष 2019 में करीब 77 फीसद मरीजों की एचआईवी जाँच कराई गयी जो कि पिछले साल के मुकाबले करीब 11 फीसद अधिक है ।

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