गोण्डा:65 लाख रुपये बरामदगीे के मामले में पुलिस की भूमिका सन्देहास्पद | CRIME JUNCTION गोण्डा:65 लाख रुपये बरामदगीे के मामले में पुलिस की भूमिका सन्देहास्पद
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गोण्डा:65 लाख रुपये बरामदगीे के मामले में पुलिस की भूमिका सन्देहास्पद

रजनीश/ज्ञान प्रकाश 

करनैलगंज(गोंडा)। पुलिस द्वारा वाहनों की चेकिंग व तलाशी के दौरान 65 लाख रुपये बरामदगीे के मामले में भूमिका सन्देहास्पद हो रही है। 


इतनी बड़ी रकम बरामद होने के बाद बिना किसी राजपत्रित या प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी के रुपयों को गिनकर बड़ी कामयाबी मिलने की बात कही गई। 


जबकि बरामदगी व गिनती के बाद उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। मौके से बरामद रुपयों को भम्भुआ पुलिस चौकी लाया गया उसके बाद नोटों को गिनती करके करनैलगंज कोतवाली लाकर आयकर के अधिकारियों के समक्ष रखा गया। 


पुलिस की इस कार्रवाई से कोतवाली पुलिस की किरकिरी हुई। केवल पुलिस अधिकारियों को जानकारी देने के बाद फ्लाइंग स्क्वायड टीम व उप जिलाधिकारी को सूचना दी गई। 


पुलिस के द्वारा चलाए जा रहे वाहन चेकिंग अभियान के दौरान आज कार से 65 लाख रुपए लेकर जा रहे दो भाई पकड़ लिए गए। 


जिसके बाद पुलिस पकड़े गए आरोपियों को लेकर भंभुआ चौकी पहुंची, साथ ही गाडी में बरामद रुपयों को पुलिस ने जब्त कर लिया। 


पुलिस की कार्यवाही में बढ़नी सिद्धार्थनगर के निवासी चंदन अग्रवाल व कन्हैयालाल अग्रवाल को पुलिस ने 65 लाख रुपए के साथ गिरफ्तार कर लिया। 


घटना के बाद पुलिस ने इसकी जानकारी उपजिलाधिकारी हीरालाल को दी। 


जिस पर मौके पर पहुंचे एसडीएम हीरालाल ने पकड़े गए दोनों भाइयों से पूछताछ शुरू की, साथ ही घटना की सूचना आयकर विभाग को भी दी। 


एसडीएम हीरालाल आयकर विभाग के आने की प्रतीक्षा में थे मगर उससे पहले ही मौके पर मौजूद कोतवाल प्रदीप कुमार सिंह ने आयकर विभाग के आने से पहले ही रुपयों को लेकर कोतवाली करनैलगंज पहुंचे। 


जहां उन्होंने मामले का खुलासा किया। 

सबसे खास बात देखने वाली यह थी कि कोतवाली करनैलगंज में एसडीएम हीरालाल व क्षेत्राधिकारी मुन्ना उपाध्याय के साथ आयकर विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। 


उसके बावजूद कोतवाल ने अकेले ही मामले का खुलासा कर दिया। जिससे कोतवाल की भूमिका सन्देहास्पद बनी हुई है। 


उधर उपजिलाधिकारी हीरालाल का कहना है कि उन्हें जब सूचना मिली तो वे तत्काल मौके पर पहुंचे मगर पुलिस उसके पहले नोटों की गड्डियां गिनती करने में लगी थी। 


वहां पर किसी प्रकार की फोटो या वीडियोग्राफी नही कराई जा रही थी। उधर कोतवाल द्वारा मीडिया कर्मियों को भी मौके पर फोटो या वीडियो बनाने से रोका गया था। 


कोतवाल प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि रुपये की बरामदगी होने के बाद तत्काल सभी अधिकारियों को सूचना दे दी गई थी।

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