जिम्मेदारों के संरक्षण में बनाये गए मानक विहीन शौचालय
ओडीएफ घोषित होने के बाद भी खुले में शौच को मजबूर ग्रामीण
आयुष मौर्य
धौरहरा खीरी। प्रधानमंत्री द्वारा चलाए गए स्वच्छ भारत मिशन अभियान के अंतर्गत शहर से लेकर ग्रामीण अंचल तक पूरे देश को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए प्रत्येक घर को शौचालय देने के लिए शौचालय योजना चलाई गई।
स्वच्छ भारत मिशन अभियान को बडी जोर शोर से चलाया गया इसके बावजूद भी अभी तक देश को खुले में शौच मुक्त नहीं बनाया जा सका है।
भले ही सरकार के नुमाइंदो ने कागजी घोड़े दौड़ाते हुए कागजों पर गाँवो को ओडीएफ दर्शा कर अपना कोरम पूरा कर लिया हो लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 50 प्रतिशत ग्रामीण शौचालयों के अभाव में खुले में शौंच जाने के लिए मजबूर हैं।
हम बात कर रहे है जिले के विकास क्षेत्र धौरहरा की जहां अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों को ओडीएफ घोषित कर दिया है। जबकि हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
क्षेत्र में एडीओ पंचायत , ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की मिलीभगत से केवल कागजी घोड़े दौड़ाते हुए गांवों को भले ही खुले से शौंच मुक्त कर ओडीएफ घोषित कर दिया गया हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है।
ग्रामीणों की माने तो करीब 40 प्रतिशत ग्रामीणों को अभी भी इज्जत घर नहीं उपलब्ध कराए गए है।
जो बने भी है वह भी कमीशन खोरी व भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके है। जिसके कारण बनााए गए मानक विहीन शौचालयों में अधिकांश केवल शो पीस बन कर रह गए है कुछ तो बल्लियों के सहारे अपने आप को रोके हुए है तो कुछ की कमर टेढ़ी हो चुकी है तो कहीं दरार आ गयी है तो कहीं टैंक धंस गए है।
शौचालयों में प्रयोग की गई मानक विहीन सामग्री
विकास क्षेत्र में बनाए गए इज्जतघरों के निर्माण के समय मानक विहीन सामग्री का प्रयोग किया गया है । जिससे शौचालय बनने के कुछ दिन बाद ही जर्जर हो गए ।
ग्रामीणों की माने तो हकीकत यह है कि ग्राम पंचायतों में होने वाले इज्जत घरों के निर्माण या तो ठेकेदारों के माध्यम से या प्रधान द्वारा स्वयं या फिर प्रधान के चहेते लोगों द्वारा पीला ईट, घटिया सीमेंट से कराकर 6 से 7 हजार रुपए में बनवाकर शौचालय खड़े कर दिए गए है।
परिणामतः कुछ शौचालय तो बनाते समय ही गिरने के मामले प्रकाश में आने लगे और कुछ शौचालय चंद दिनों बाद बैसाखी पर आ गए।
लेकिन ब्लॉक स्तरीय ईमानदार व कर्तव्य निष्ठ अधिकारियों से कई बार शिकायत के बाद भी शौचालय की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सका ।
जबकि अधिकारियों ने पूरे विकास क्षेत्र को ओडीएफ घोषित करवा दिया ।
जांच टीमो को नही दिखी शौचालय निर्माण में धांधली
गांवों में बनाए गए इज्जतघरों के निर्माण में प्रयोग की गई मानक विहीन सामग्री के प्रयोग व भ्रष्टाचार के मामले सामने आने के बाद इज्जतघरों की जांच करने को टीमों का गठन किया गया था।
जांच टीमों ने भी गांवों में जाकर जांच की पर टीमों को भी शौचालय निर्माण में कहीं खामी नजर नहीं आई ।
हर खास व आम ग्रामीण के जेहन में एक ही सवाल उलझ कर रह गया है - आखिर जिले से लेकर स्थानीय जांच टीमों को शौचालय निर्माण की बड़ी धांधली जांच के दौरान क्यों नही दिख रही? या हमारे देश के ईमानदार अफसर देख कर अनदेखा कर रहे है? अब कमीशन खोरी के बाद बनाये गए मानक विहीन शौचालय कितने दिन खुले में शौच मुक्त अभियान का साथ दे पाएंगे यह आने वाला समय ही तय करेगा।
इस प्रकार से इज्जत घरों की इज्जत ही दाँव पर लगी है तो कैसे बचेगी खुले में शौंच जाने वालों की इज्जत?

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